हिंदी ( कक्षा 10) — क्षितिज भाग 2 और कृतिका भाग 2

यहाँ NCERT की कक्षा 10वीं की हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘क्षितिज भाग 2’ में संकलित सभी अध्यायों का मूल पाठ, कविताओं की व्याख्या और अभ्यास के प्रश्न दिए गए हैं जो विद्यार्थियों के लिए परीक्षापयोगी होंगे | काव्य खंड ▪️ पद ( सूरदास ) ▪️राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद ( तुलसीदास ) ▪️कवित्त और सवैया ( देव कवि ) … Read more

हिंदी ( कक्षा 9) — क्षितिज भाग 1 और कृतिका भाग 1

यहाँ NCERT की कक्षा 9वीं की हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘क्षितिज भाग 1’ में संकलित सभी अध्यायों का मूल पाठ, कविताओं की व्याख्या और अभ्यास के प्रश्न दिए गए हैं जो विद्यार्थियों के लिए परीक्षापयोगी होंगे | गद्य खंड (1) दो बैलों की कथा ( मुंशी प्रेमचंद) / Do Bailon Ki Katha ( Munshi Premchand ) … Read more

हिंदी ( कक्षा 12) ( आरोह व वितान )

आरोह भाग 2 ( काव्य खंड ) आत्मपरिचय ( Aatm Parichay ) : हरिवंश राय बच्चन दिन जल्दी-जल्दी ढलता है ( हरिवंश राय बच्चन ) पतंग ( आलोक धन्वा ) कविता के बहाने ( कुंवर नारायण ) बात सीधी थी पर ( कुंवर नारायण ) कैमरे में बंद अपाहिज ( रघुवीर सहाय ) सहर्ष स्वीकारा … Read more

हिंदी ( कक्षा 11) — आरोह व वितान

आरोह भाग 1 (गद्य खंड) नमक का दारोगा ( कहानी) : प्रेमचंद मियाँ नसिरुद्दीन ( रेखाचित्र ) : कृष्णा सोबती अपु के साथ ढाई साल ( संस्मरण ): सत्यजित राय विदाई संभाषण ( निबंध ) : बालमुकुंद गुप्त गलता लोहा ( शेखर जोशी ) स्पीति में बारिश ( कृष्णनाथ ) रजनी ( मन्नू भंडारी )/ … Read more

रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि : केशव, चिंतामणि, मतिराम, भूषण, देव, पद्मकर

(1) केशवदास ( Keshavdas ) जीवन परिचय: केशवदास (1555-1617 ई.) रीतिकाल के प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण कवियों में से एक थे। उनका जन्म ओरछा (मध्य प्रदेश) में एक सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे बुंदेलखंड के राजा इंद्रजीत सिंह और बाद में राजा वीरसिंह देव के आश्रय में रहे। केशव को हिंदी साहित्य में … Read more

सूफ़ी काव्य धारा के प्रसिद्ध कवि : मुल्ला दाऊद, क़ुतुबन, मँझन, जायसी

(1) मुल्ला दाऊद जीवन परिचय: मुल्ला दाऊद (14वीं शताब्दी) हिंदी साहित्य के सूफी काव्य धारा के प्रथम कवि माने जाते हैं। उनका समय फिरोजशाह तुगलक (1351-1388 ई.) के शासनकाल से माना जाता है, और उनकी प्रमुख रचना चंदायन 1379 ई. में रचित हुई। मुल्ला दाऊद का जन्म और व्यक्तिगत जीवन के बारे में प्रामाणिक जानकारी … Read more

आदिकाल के प्रसिद्ध कवि : चंदबरदाई, नरपति नाल्ह, जगनिक, विद्यापति, स्वयंभू, अमीर खुसरो

(1) चंदबरदाई जीवन परिचय: चंदबरदायी या चंदवरदाई (12वीं शताब्दी) आदिकाल के सबसे प्रसिद्ध रासो कवि हैं, जिन्हें हिंदी साहित्य का प्रथम महाकवि माना जाता है। उनका जन्म और जीवनकाल ठीक-ठीक निर्धारित नहीं है, परंतु विद्वानों के अनुसार वे 12वीं शताब्दी में दिल्ली और अजमेर के चौहान शासक पृथ्वीराज तृतीय (1178-1192 ई.) के दरबारी कवि थे। … Read more

रीतिकाल की परिस्थितियाँ (1643-1843 ई.)

रीतिकाल (लगभग 1643-1843 ई., संवत 1700-1900) हिंदी साहित्य का वह युग है, जो श्रृंगारिक काव्य, काव्यशास्त्र और अलंकारों के प्रभुत्व के लिए जाना जाता है। यह काल भक्तिकाल की आध्यात्मिकता से भिन्न, दरबारी और सौंदर्यबोधी साहित्य पर केंद्रित था। रीतिकाल की साहित्यिक परिस्थितियाँ तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक-आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से गहराई से प्रभावित थीं। … Read more

संत कवि : नानक, रैदास और दादू दयाल

गुरु नानक (1469-1539 ) गुरु नानक, सिख धर्म के संस्थापक और भक्तिकाल के प्रमुख निर्गुण भक्ति कवि, हिंदी साहित्य में अपनी आध्यात्मिक गहनता, सामाजिक सुधार के संदेश और सरल काव्य शैली के लिए विख्यात हैं। उनका जन्म 1469 में तलवंडी (वर्तमान ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। नानक की रचनाएँ मुख्य रूप से गुरु ग्रंथ … Read more

भक्तिकाल की परिस्थितियाँ

भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है जिसकी समय-सीमा संवत 1375 से संवत 1700 (लगभग 1318-1643 ई.) तक मानी जाती है। यह काल भक्ति आंदोलन के उदय और प्रसार का काल था, जिसने हिंदी साहित्य को आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध किया। भक्तिकाल की साहित्यिक परिस्थितियाँ राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और … Read more

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की समस्याएँ

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा 19वीं शताब्दी से प्रारंभ हुई, जिसमें विदेशी विद्वानों जैसे गार्सां द तासी और जॉर्ज ग्रियर्सन से लेकर भारतीय विद्वानों जैसे शिवसिंह सेंगर, मिश्र बंधु, रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी, डॉ. नगेन्द्र, रामकुमार वर्मा और गणपति चंद्र गुप्त ने योगदान दिया। इस परंपरा ने हिंदी साहित्य को व्यवस्थित और वैज्ञानिक … Read more

हिंदी के साहित्येतिहास लेखन की परंपरा

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा का विकास 19वीं और 20वीं शताब्दी में हुआ जिसमें विदेशी और भारतीय विद्वानों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह परंपरा साहित्य को व्यवस्थित, विश्लेषणात्मक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास है। कुछ उल्लेखनीय प्रयास निम्नलिखित हैं : गार्सां द तासी (Garcin de Tassy) फ्रेंच विद्वान गार्सां द तासी … Read more

हिंदी साहित्य का इतिहास ( एम ए प्रथम सेमेस्टर ) पेपर -2 ( KUK )

इकाई 1 इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दर्शन हिंदी के साहित्येतिहास लेखन की परंपरा हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की समस्याएँ हिंदी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन और नामकरण आदिकाल की परिस्थितियां ( Aadikal Ki Paristhitiyan ) आदिकाल का नामकरण और सीमा निर्धारण ( Aadikaal Ka Naamkaran aur Seema Nirdharan) आदिकाल : प्रमुख कवि, रचनाएं … Read more

पत्र लेखन : अर्थ, परिभाषा, भेद व विशेषताएँ

पत्र एक लिखित संवाद का रूप है, जिसे किसी व्यक्ति, संगठन, या संस्था को भेजा जाता है। यह एक औपचारिक या अनौपचारिक तरीके से जानकारी, विचार, अनुरोध, या संवाद सांझा करने का एक साधन है। पत्र आमतौर पर एक निश्चित प्रारूप और संरचना का पालन करता है | इसमें निम्नलिखित तत्त्व शामिल होते हैं : … Read more

शब्द और पद ( Shabd Aur Pad )

शब्द : दो या दो से अधिक वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं | जैसे – कमल, फूल, काला आदि शब्द हैं लेकिन अउइए, कफच, चबट आदि वर्णों का समूह होने पर भी शब्द नहीं हैं क्योंकि इनसे किसी अर्थ की अभिव्यक्ति नहीं होती | अतः वर्णों के ऐसे समूह को ही शब्द … Read more

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