काव्य में लोक-मंगल की साधनावस्था : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल / Kavya Mein Lok-Mangal Ki Sadhanavastha : Acharya Ramchandra Shukla
तदेजति तन्नैजति—ईशावास्योपनिषद् आत्मबोध और जगद्बोधा के बीच ज्ञानियों ने गहरी खाई खोदी पर हृदय ने कभी उसकी परवा न की; भावना दोनों को एक ही मनकर चलती रही। इस जगत् के बीच जिस आनंद मंगल की विभूति का साक्षात्कार होता रहा उसी के स्वरूप की नित्य और चरम भावना द्वारा भक्तों के हृदय में भगवान् … Read more