श्रवण संप्रेषण का महत्वपूर्ण अंग है | श्रवण वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति सामने वाले की बात को ध्यानपूर्वक सुनकर उसका अर्थ समझता है। इसमें केवल कानों से सुनना ही नहीं, बल्कि मन और बुद्धि से समझना भी शामिल होता है। प्रभावी श्रवण से संदेश का सही अर्थ ग्रहण किया जा सकता है। यह संप्रेषण को सफल और सार्थक बनाता है। श्रवण की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिना अच्छे सुनने के कोई भी संवाद पूर्ण नहीं हो सकता।
श्रवण के मुख्य प्रकार
(1) सक्रिय श्रवण (Active Listening) –– सक्रिय श्रवण में श्रोता पूरी एकाग्रता से वक्ता की बात सुनता है। वह बीच-बीच में संकेत देकर बताता है कि वह समझ रहा है। प्रश्न पूछकर और उत्तर देकर संवाद को आगे बढ़ाता है। यह सबसे प्रभावी श्रवण माना जाता है।
(2) निष्क्रिय श्रवण (Passive Listening) — निष्क्रिय श्रवण में श्रोता केवल सुनता है लेकिन सक्रिय प्रतिक्रिया नहीं देता। ध्यान पूरी तरह केंद्रित नहीं होता। कई बार संदेश का अर्थ अधूरा समझ में आता है। यह औपचारिक या मजबूरी में होने वाला श्रवण है।
(4) सहानुभूतिपूर्ण श्रवण (Empathetic Listening) — इस प्रकार के श्रवण में श्रोता वक्ता की भावनाओं को समझने का प्रयास करता है। वह स्वयं को वक्ता की स्थिति में रखकर सुनता है। इससे भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है। यह पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में उपयोगी होता है।
(5) आलोचनात्मक श्रवण (Critical Listening) — आलोचनात्मक श्रवण में श्रोता बात को तर्क और विवेक से सुनता है। वह तथ्य और तर्क का मूल्यांकन करता है। सही और गलत में अंतर करता है। यह भाषण, बहस और निर्णय-निर्माण में सहायक होता है।
(6) आनंदात्मक श्रवण (Appreciative Listening) — आनंदात्मक श्रवण में श्रोता आनंद या मनोरंजन के लिए सुनता है। जैसे संगीत, कविता, कहानी या भाषण। इसमें भावनात्मक संतोष मिलता है। यह मानसिक तनाव को कम करता है।
यह भी देखें :
▪️हिंदी भाषा एवं संप्रेषण : मौखिक संप्रेषण ( Level 2) ( BA 2nd Semester Kuk )