नीड़ का निर्माण फिर
( हरिवंशराय बच्चन )
- प्रश्न: ‘नीड़ का निर्माण फिर’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: हरिवंशराय बच्चन। - प्रश्न: हरिवंशराय बच्चन का जन्म कब हुआ था?
उत्तर: 27 नवंबर 1907 को। - प्रश्न: बच्चन जी का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: प्रयागराज (इलाहाबाद), उत्तर प्रदेश में। - प्रश्न: हिंदी साहित्य में ‘हालावाद’ का प्रवर्तक (शुरुआत करने वाला) किस कवि को माना जाता है?
उत्तर: हरिवंशराय बच्चन को। - प्रश्न: बच्चन जी की सबसे प्रसिद्ध काव्य-कृति कौन-सी है, जिसने उन्हें रातों-रात मशहूर कर दिया?
उत्तर: ‘मधुशाला’। - प्रश्न: हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा कुल कितने खंडों (भागों) में प्रकाशित हुई है?
उत्तर: चार खंडों में। - प्रश्न: उनकी आत्मकथा का पहला खंड कौन-सा है?
उत्तर: ‘क्या भूलूँ क्या याद करूँ’। - प्रश्न: उनकी आत्मकथा के तीसरे और चौथे खंड का नाम क्या है?
उत्तर: ‘बसेरे से दूर’ (तीसरा) और ‘दशद्वार से सोपान तक’ (चौथा)। - प्रश्न: बच्चन जी ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (इंग्लैंड) से किस अंग्रेजी कवि पर अपना शोध (Ph.D.) पूरा किया था?
उत्तर: डब्ल्यू. बी. यीट्स (W.B. Yeats) पर। - प्रश्न: भारत सरकार ने साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए बच्चन जी को किस सम्मान से अलंकृत किया था?
उत्तर: पद्म भूषण (1976 में)। - प्रश्न: बच्चन जी को उनकी किस रचना के लिए ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ मिला था?
उत्तर: ‘दो चट्टानें’ (कविता संग्रह) के लिए। - प्रश्न: हरिवंशराय बच्चन का निधन कब हुआ?
उत्तर: 18 जनवरी 2003 को ( मुंबई में ) । - प्रश्न: ‘नीड़’ शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर: घोंसला (या घर)। - प्रश्न: ‘नीड़ का निर्माण फिर’ हिंदी गद्य की किस विधा की रचना है?
उत्तर: आत्मकथा । - प्रश्न: इस आत्मकथा में बच्चन जी की किस पत्नी के निधन के बाद के जीवन का वर्णन है?
उत्तर: उनकी पहली पत्नी ‘श्यामा’ के निधन के बाद का। - प्रश्न: बच्चन जी की पहली पत्नी (श्यामा) का निधन किस बीमारी के कारण हुआ था?
उत्तर: टी.बी. (क्षय रोग) के कारण। - प्रश्न: पत्नी की मृत्यु के बाद बच्चन जी किस मानसिक स्थिति से गुजर रहे थे?
उत्तर: वे गहरे अवसाद , निराशा और अकेलेपन से गुजर रहे थे। - प्रश्न: श्यामा की मृत्यु के दुःख और शून्यता के दौर में बच्चन जी ने कौन-सी प्रसिद्ध शोक-रचनाएँ लिखीं?
उत्तर: ‘निशा निमंत्रण’ और ‘एकांत संगीत’। - प्रश्न: भारी कर्ज और गरीबी के उस दौर में बच्चन जी अपने परिवार का पेट पालने के लिए क्या काम करते थे?
उत्तर: वे ट्यूशन पढ़ाते थे। - प्रश्न: 31 दिसंबर 1941 को बरेली में बच्चन जी की मुलाकात किस महिला से हुई, जिसने उनका जीवन बदल दिया?
उत्तर: तेजी सूरी (जो बाद में तेजी बच्चन बनीं) से। - प्रश्न: बच्चन जी बरेली में अपने किस मित्र के घर गए हुए थे, जहाँ वे तेजी से मिले?
उत्तर: अपने मित्र ‘प्रकाश’ के घर। - प्रश्न: तेजी जी मूल रूप से किस समुदाय/प्रांत से संबंध रखती थीं?
उत्तर: वे एक संपन्न पंजाबी खत्री परिवार से थीं। - प्रश्न: हरिवंशराय बच्चन और तेजी जी का विवाह कब हुआ?
उत्तर: 24 जनवरी 1942 को (इलाहाबाद में)। - प्रश्न: उस समय के समाज ने बच्चन जी और तेजी जी के विवाह को बगावत क्यों माना?
उत्तर: क्योंकि वह एक अंतर-प्रांतीय और अंतर-जातीय विवाह (Inter-caste marriage) था और बच्चन जी विधुर थे। - प्रश्न: तेजी जी के जीवन में आने से बच्चन जी की कविताओं में क्या बदलाव आया?
उत्तर: उनकी कविताओं से निराशा खत्म हो गई और उन्होंने आशा तथा जीवन-राग के गीत लिखने शुरू कर दिए। - प्रश्न: हरिवंशराय बच्चन और तेजी बच्चन के दोनों पुत्रों का क्या नाम है?
उत्तर: अमिताभ और अजिताभ। - प्रश्न: आँधी आने पर जब घोंसला पूरी तरह उजड़ जाता है, तो इस पाठ के अनुसार पक्षी क्या करता है?
उत्तर: पक्षी हार नहीं मानता और फिर से तिनके बटोरकर नया घोंसला (नीड़) बनाता है। - प्रश्न: “नाश के दुख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख” – यह प्रसिद्ध पंक्ति किस पाठ का मूल स्वर है?
उत्तर: ‘नीड़ का निर्माण फिर’ का। - प्रश्न: पाठ के अनुसार, प्रलय (विनाश) की शांति के बाद सृष्टि क्या करती है?
उत्तर: सृष्टि फिर से नव-गान (नया निर्माण) करती है। - प्रश्न: इस आत्मकथा का मुख्य उद्देश्य या मूल संदेश क्या है?
उत्तर: जीवन में चाहे सब कुछ नष्ट क्यों न हो जाए, मनुष्य को निराश होकर हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि फिर से नवनिर्माण करना चाहिए।
जीप पर सवार इल्लियाँ
( शरद जोशी )
- प्रश्न: ‘जीप पर सवार इल्लियाँ’ पाठ के रचयिता (लेखक) कौन हैं?
उत्तर: शरद जोशी। - प्रश्न: शरद जोशी का जन्म कब हुआ था?
उत्तर: 21 मई, 1931 को। - प्रश्न: शरद जोशी जी का जन्म किस स्थान पर हुआ था?
उत्तर: उज्जैन (मध्य प्रदेश) में। - प्रश्न: हिंदी साहित्य में शरद जोशी की पहचान मुख्य रूप से किस विधा के रचनाकार के रूप में है?
उत्तर: एक शीर्ष व्यंग्यकार के रूप में। - प्रश्न: शरद जोशी जी की किन्हीं दो प्रमुख व्यंग्य रचनाओं के नाम बताइए।
उत्तर: ‘परिक्रमा’, ‘किसी बहाने’, ‘तिलिस्म’ और ‘रहा किनारे बैठ’। - प्रश्न: भारत सरकार द्वारा शरद जोशी को किस प्रतिष्ठित सम्मान से अलंकृत किया गया था?
उत्तर: पद्मश्री (1990 में)। - प्रश्न: शरद जोशी ने दूरदर्शन के किन प्रसिद्ध धारावाहिकों का लेखन किया था?
उत्तर: ‘ये जो है ज़िंदगी’, ‘विक्रम बेताल’ और ‘मालगुडी डेज़’ (संवाद लेखन)। (उनका व्यंग्य नाटक ‘लापतागंज’ भी बहुत मशहूर हुआ)। - प्रश्न: शरद जोशी जी का निधन कब हुआ?
उत्तर: 5 सितंबर, 1991 को। - प्रश्न: शरद जोशी के व्यंग्यों का मुख्य विषय (निशाना) क्या रहा है?
उत्तर: सामाजिक विसंगतियाँ, राजनीतिक भ्रष्टाचार और अफसरशाही का खोखलापन। - प्रश्न: ‘जीप पर सवार इल्लियाँ’ उनके किस विधा के अंतर्गत आता है?
उत्तर: यह एक संस्मरणात्मक व्यंग्य निबंध है। - प्रश्न: लेखक के अनुसार चने के पेड़ होते हैं या पौधे?
उत्तर: चने के पौधे होते हैं। - प्रश्न: खराब मौसम के कारण चने के खेतों में क्या लग गई थी?
उत्तर: इल्ली लग गई थी। - प्रश्न: एक अखबार ने चने के पौधे पर बैठी किसकी तस्वीर छापी थी?
उत्तर: इल्ली की तस्वीर। - प्रश्न: लेखक के ज्ञानी मित्र ने अन्न की अधिष्ठात्री (माता) देवी किसे बताया है?
उत्तर: ‘इला’ (पृथ्वी) को। - प्रश्न: लेखक के अनुसार इल्लियाँ किसकी पुत्रियाँ हैं?
उत्तर: इला की पुत्रियाँ हैं। - प्रश्न: पाठ में ‘इल्ली’ को अन्न की कौन-सी देवी कहा गया है?
उत्तर: अन्न की नष्टार्थी देवी। - प्रश्न: जब अखबारों ने शोर मचाया, तो किसने भाषण शुरू किए?
उत्तर: नेताओं ने। - प्रश्न: कृषि अधिकारी ने लेखक को जीप में बैठकर कहाँ चलने के लिए कहा?
उत्तर: इल्ली उन्मूलन की प्रगति देखने खेतों में। - प्रश्न: खेतों की खुदाई करने पर क्या निकलता है (किसान के जवाब के अनुसार)?
उत्तर: मिट्टी निकलती है। - प्रश्न: खेतों का दौरा करते समय बड़ा अफसर छोटे अफसर से किसके बारे में सवाल पूछता है?
उत्तर: खेत में इल्लियों के होने या न होने के बारे में। - प्रश्न: बड़े अफसर ने छोटे अफसर को घर ले जाने के लिए जीप में क्या रखवाने का हुक्म दिया?
उत्तर: हरा चना (बूट)। - प्रश्न: छोटे अफसर ने किसान को किस बात का डर दिखाया?
उत्तर: खेत में इल्ली होने का और इस अपराध में खेत जब्त हो जाने का। - प्रश्न: किसान खेत से उखाड़कर जीप में क्या रखने लगा?
उत्तर: चने के पौधे (हरा चना)। - प्रश्न: खेतों में चहलकदमी करते हुए बड़े अफसर ने किसे याद किया और किसकी कविता सुनाई?
उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त की ग्राम जीवन पर लिखी कविता। - प्रश्न: बड़े अफसर ने मैथिलीशरण गुप्त की वह कविता किस कक्षा में रटी थी?
उत्तर: आठवीं कक्षा में। - प्रश्न: वापसी के समय जीप में हरे चनों का क्या पड़ा था?
उत्तर: ढेर पड़ा था। - प्रश्न: लेखक को एकाएक क्या लगा कि जीप पर कितनी इल्लियाँ सवार हैं?
उत्तर: तीन इल्लियाँ सवार हैं। - प्रश्न: पाठ में आए शब्द ‘उन्मूलन’ का क्या अर्थ बताया गया है?
उत्तर: जड़ से उखाड़ देना। - प्रश्न: पाठ में आए शब्द ‘वक्तव्य’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: कथन। - प्रश्न: इस पूरे व्यंग्य में ‘जीप पर सवार इल्लियाँ’ वास्तव में किसे कहा गया है?
उत्तर: किसानों का मुफ्त में शोषण करने वाले उन तीन लोगों को — बड़ा अफसर, छोटा अफसर और स्वयं लेखक।
बयालीस के ज्वार की लहरों में
(कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर )
- प्रश्न: ‘बयालीस के ज्वार की लहरों में’ पाठ के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’। - प्रश्न: कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म कब हुआ?
उत्तर: 29 मई, 1906 ई. को। - प्रश्न: ‘प्रभाकर’ जी का जन्म किस स्थान पर हुआ था?
उत्तर: देवबन्द, जिला सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) में। - प्रश्न: ‘प्रभाकर’ जी को हिंदी गद्य की किन विधाओं को समृद्ध करने का श्रेय जाता है?
उत्तर: रेखाचित्र, संस्मरण और रिपोर्ताज। - प्रश्न: ‘प्रभाकर’ जी ने किन प्रमुख पत्रिकाओं का सफल संपादन किया?
उत्तर: ‘ज्ञानोदय’ और ‘नया जीवन’। - प्रश्न: भारत सरकार ने कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ को किस प्रतिष्ठित सम्मान से अलंकृत किया था?
उत्तर: पद्मश्री (1990 में)। - प्रश्न: ‘माटी हो गई सोना’, ‘जिंदगी मुस्कराई’ और ‘दीप जले शंख बजे’ किसकी प्रमुख रचनाएँ हैं?
उत्तर: कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ की। - प्रश्न: क्या कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े थे?
उत्तर: हाँ, वे एक सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे और कई बार जेल भी गए। - प्रश्न: कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ जी का निधन कब हुआ?
उत्तर: 9 मई, 1995 को। - प्रश्न: ‘प्रभाकर’ जी हिंदी साहित्य के किस युग के प्रमुख गद्यकार माने जाते हैं?
उत्तर: शुक्लोत्तर युग (स्वातंत्र्योत्तर युग) के। - प्रश्न: ‘बयालीस के ज्वार की लहरों में’ हिंदी गद्य की कौन-सी विधा है?
उत्तर: यह एक संस्मरण (तथा रेखाचित्र) है। - प्रश्न: यह संस्मरण ‘प्रभाकर’ जी के किस प्रसिद्ध संकलन (किताब) से लिया गया है?
उत्तर: ‘माटी हो गई सोना’ से। - प्रश्न: पाठ के शीर्षक में ‘बयालीस का ज्वार’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: सन् 1942 का ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (अगस्त क्रांति)। - प्रश्न: इस संस्मरण में लेखक ने किस कालखंड की स्मृतियों को उकेरा है?
उत्तर: 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान की स्मृतियों को। - प्रश्न: पाठ में किन लोगों की गौरव गाथा प्रस्तुत की गई है?
उत्तर: मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की बाज़ी लगाने वाले देशभक्तों और बलिदानियों की। - प्रश्न: प्रस्तुत पाठ में किस विदेशी सत्ता के निर्मम अत्याचारों का वर्णन किया गया है?
उत्तर: अंग्रेजी (ब्रिटिश) सत्ता के अत्याचारों का। - प्रश्न: 1942 के आंदोलन के दौरान भारत की जनता के मन में कौन सा भाव प्रबल था?
उत्तर: ‘करो या मरो’ का भाव। - प्रश्न: लेखक के अनुसार, देशभक्तों के सामने स्वार्थ और सुविधा का मार्ग भी था, पर उन्होंने कौन सा मार्ग चुना?
उत्तर: त्याग, संघर्ष और बलिदान के कांटों भरा मार्ग। - प्रश्न: संस्मरण के अनुसार, देशभक्तों ने किसे प्राथमिकता दी—बुद्धि की चालाकी को या आत्मा की आवाज़ को?
उत्तर: उन्होंने अपनी आत्मा और भावुकता की आवाज़ को प्राथमिकता दी। - प्रश्न: अंग्रेजी सरकार ने ‘बयालीस के ज्वार’ (आंदोलन) को दबाने के लिए क्या किया?
उत्तर: उन्होंने भयंकर दमन-चक्र चलाया और निहत्थी जनता पर अमानवीय अत्याचार किए। - प्रश्न: पाठ में प्रयुक्त शब्द ‘ज्वार’ किसका प्रतीक है?
उत्तर: भारतीय जनमानस में उठे क्रांति और आक्रोश के उफान का। - प्रश्न: 1942 के आंदोलन की घोषणा किसने की थी?
उत्तर: महात्मा गांधी ने। - प्रश्न: ‘बयालीस के ज्वार की लहरों में’ पाठ का मूल स्वर क्या है?
उत्तर: राष्ट्रीयता, देशभक्ति और अमर बलिदान का स्मरण। - प्रश्न: क्या इस पाठ में वर्णित घटनाएँ कल्पित हैं या यथार्थ पर आधारित हैं?
उत्तर: यह पूर्णतः यथार्थ (सच्ची) और लेखक के स्वानुभूत (खुद महसूस किए गए) अनुभवों पर आधारित है। - प्रश्न: पाठ के अनुसार, 1942 में भारत का कौन सा हिस्सा आंदोलन से प्रभावित हुआ था?
उत्तर: संपूर्ण देश की जनता इस आंदोलन में कूद पड़ी थी। - प्रश्न: इस संस्मरण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: नई पीढ़ी को स्वाधीनता संग्राम के वीरों के त्याग से परिचित कराना और उनमें देशप्रेम जगाना। - प्रश्न: लेखक ने 1942 के वीरों को किस रूप में याद किया है?
उत्तर: भारत माता की बेड़ियाँ काटने वाले अमर सपूतों के रूप में। - प्रश्न: संस्मरण में किस बात पर गहरा शोक या आक्रोश व्यक्त किया गया है?
उत्तर: विदेशी शासकों द्वारा मासूम और निहत्थे भारतीयों के खून बहाए जाने पर। - प्रश्न: लेखक के अनुसार, मातृभूमि को दासता से मुक्त कराने के लिए युवा किस बात के लिए सदैव तत्पर रहते थे?
उत्तर: अपने प्राणों को हँसते-हँसते न्यौछावर करने के लिए। - प्रश्न: कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ ने अपने इस संस्मरण की भाषा कैसी रखी है?
उत्तर: ओजपूर्ण, भावपूर्ण और चित्रात्मक भाषा।
पुरुष और परमेश्वर
(रामवृक्ष बेनीपुरी )
- प्रश्न: रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: 23 दिसंबर 1899 को, बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बेनीपुर गाँव में। - प्रश्न: हिंदी साहित्य में रामवृक्ष बेनीपुरी जी को किस उपनाम से जाना जाता है?
उत्तर: ‘कलम का जादूगर’। - प्रश्न: बेनीपुरी जी की किन्हीं तीन प्रसिद्ध रचनाओं के नाम बताइए।
उत्तर: ‘माटी की मूरतें’, ‘गेहूँ और गुलाब’, और ‘पतितों के देश में’। - प्रश्न: उनका प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक कौन-सा है?
उत्तर: ‘अम्बपाली’ (आम्रपाली)। - प्रश्न: बेनीपुरी जी ने किन प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया?
उत्तर: ‘तरुण भारत’, ‘किसान मित्र’, ‘बालक’, ‘युवक’ और ‘जनता’ आदि। - प्रश्न: क्या रामवृक्ष बेनीपुरी जी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े थे?
उत्तर: हाँ, वे एक सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे और आंदोलन के दौरान कई बार जेल भी गए (जिसका वर्णन उनकी पुस्तक ‘जंजीरें और दीवारें’ में है)। - प्रश्न: ‘माटी की मूरतें’ गद्य की किस विधा की रचना है?
उत्तर: यह रेखाचित्र/संस्मरण विधा की रचना है। - प्रश्न: उनके निबंध संग्रह ‘गेहूँ और गुलाब’ में ‘गेहूँ’ और ‘गुलाब’ क्रमशः किसके प्रतीक हैं?
उत्तर: गेहूँ ‘भौतिक आवश्यकताओं (भूख)’ का और गुलाब ‘मानसिक/सांस्कृतिक सौंदर्य (कला)’ का प्रतीक है। - प्रश्न: रामवृक्ष बेनीपुरी का निधन कब हुआ?
उत्तर: 9 सितंबर 1968 को। - प्रश्न: बेनीपुरी जी हिंदी गद्य साहित्य के किस युग के प्रमुख रचनाकार माने जाते हैं?
उत्तर: शुक्लोत्तर युग (स्वातंत्र्योत्तर युग) के। - प्रश्न: ‘पुरुष और परमेश्वर’ पाठ के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: रामवृक्ष बेनीपुरी। - प्रश्न: पुरुष और परमेश्वर में महत्ता को लेकर विवाद कब से चला आ रहा है?
उत्तर: यह विवाद आदि युग से चला आ रहा है। - प्रश्न: दर्शन (Philosophy) के अनुसार भगवान की रचना किसने की है?
उत्तर: मनुष्य ने अपने रूप में भगवान की रचना की है। - प्रश्न: मनुष्य के जीवन में ईश्वर का प्रारम्भ कब से माना गया है?
उत्तर: जब मनुष्य ने सपना देखना (सपनाना) सीखा, तभी से ईश्वर का प्रारम्भ हुआ। - प्रश्न: अतीतकाल के मानव को एक भगवान से संतोष क्यों नहीं था?
उत्तर: इसलिए वह अनेक भगवान खोजता रहा। - प्रश्न: प्राचीन मानव ने कहाँ-कहाँ भगवान के दर्शन किए?
उत्तर: पृथ्वी की नन्ही दूब से लेकर आकाश के इन्द्रधनुष तक में। - प्रश्न: लेखक के अनुसार ‘भगवान’ क्या है?
उत्तर: भगवान एक सपना है और एक आकांक्षा है, जिससे मानव जीवन ओतप्रोत है। - प्रश्न: आत्मा हमेशा किसका सपना देखती रहती है?
उत्तर: आत्मा हमेशा भगवान का सपना देखती रहती है। - प्रश्न: जब मानव ने खेत जोते और भगवान से वर्षा की आज्ञा माँगी, तो उत्तर में उसे क्या मिला?
उत्तर: उत्तर में केवल सूखी झंझा (तेज़ हवा) बहती रही। - प्रश्न: युद्ध-भूमि में जब मानव ने भगवान से रक्षा की प्रार्थना की, तो उसे क्या दिखा?
उत्तर: उसे वीरों की लोथ (लाशों) पर चील-कौवे भोज मनाते हुए दिखे। - प्रश्न: लेखक के अनुसार भगवान और आदमी में क्या संबंध है?
उत्तर: भगवान और आदमी एक ही सिक्के के दो रूप हैं। - प्रश्न: विशुद्ध भगवान का असल अर्थ क्या है?
उत्तर: विशुद्ध भगवान का अर्थ विशुद्ध मानव है। - प्रश्न: पाठ में सर्वसत्ताधारी भगवान को किसका प्रतीक बताया गया है?
उत्तर: उस निरंकुश राजा का, जो प्रजा का उत्पीड़न या शोषण करता है। - प्रश्न: सर्वज्ञ भगवान को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: उस पुरोहित के समान, जो जनता के अज्ञान पर अपना व्यापार चलाता है। - प्रश्न: ‘भर्त्ता’ (पालनकर्ता) के रूप में भगवान का व्यंग्यात्मक कार्य क्या है?
उत्तर: गरीबों का पालन करना, ताकि वे धनियों के पैर दबा सकें। - प्रश्न: समाज की आत्मा और जनता का दृष्टिकोण वास्तव में क्या है?
उत्तर: वही भगवान की आत्मा और भगवान का दृष्टिकोण है। - प्रश्न: लेखक अब मानव से किसकी उपासना और वंदना करने को कहता है?
उत्तर: मानव को अब मानव की ही उपासना और वंदना करनी चाहिए। - प्रश्न: मानव की शक्ति के तीन सपने कौन-से बताए गए हैं?
उत्तर: काम करने का सपना, रात का सपना, और छलना का सपना। - प्रश्न: इन तीनों सपनों में सबसे सच्चा और ‘अमर सपना’ कौन-सा है?
उत्तर: काम करने का सपना (जिसका नाम ‘जीवन’ है)। - प्रश्न: पाठ के अंत में लेखक परमात्मा के बजाय किसकी ओर देखने का संदेश देता है?
उत्तर: अपने पुरुषार्थ (कर्म) की ओर देखने का।
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