संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति अपने विचार, भावनाएँ, सूचना या संदेश दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाता है और दूसरा व्यक्ति उसे समझता है। यह विचारों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया है।
संप्रेषण शब्द संस्कृत भाषा के “सम् + प्रेषण” से बना है।
सम् का अर्थ है — पूर्ण रूप से / साथ में
प्रेषण का अर्थ है — भेजना / पहुँचाना
इस प्रकार संप्रेषण का शाब्दिक अर्थ हुआ — किसी संदेश या विचार को पूरी तरह एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना।
संप्रेषण का अंग्रेजी शब्द Communication लैटिन भाषा के “Communas / Communis” और उससे बने शब्द “Communicare” से निकला है।
Communas / Communis का अर्थ — साझा, समान, सामूहिक
Communicare का अर्थ — साझा करना, बाँटना
अर्थात Communication का मूल भाव है — विचारों और सूचनाओं को दूसरों के साथ साझा करना।
संप्रेषण की परिभाषा : संप्रेषण एक द्वि-मार्गीय प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से विचारों, सूचनाओं और भावनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है, ताकि संदेश को सही रूप में समझा जा सके।
संप्रेषण की विशेषताएँ
(1) द्वि-मार्गीय प्रक्रिया — संप्रेषण में केवल संदेश भेजना ही नहीं, बल्कि प्रतिक्रिया प्राप्त करना भी आवश्यक होता है। जब भेजने वाला और प्राप्त करने वाला दोनों सक्रिय होते हैं, तभी सही संप्रेषण होता है। प्रतिक्रिया से यह पता चलता है कि संदेश समझा गया या नहीं।
(2) निरंतर चलने वाली प्रक्रिया — संप्रेषण एक सतत प्रक्रिया है जो जीवन भर चलती रहती है। हम प्रतिदिन बोलकर, लिखकर, सुनकर और देखकर संप्रेषण करते हैं। यह प्रक्रिया कभी पूरी तरह बंद नहीं होती।
(3) उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया — हर संप्रेषण के पीछे कोई न कोई उद्देश्य होता है। जैसे सूचना देना, समझाना, प्रेरित करना या समस्या का समाधान करना। उद्देश्य के बिना संप्रेषण अर्थहीन हो जाता है।
(4) सामाजिक प्रक्रिया — संप्रेषण समाज से जुड़ा हुआ कार्य है। मनुष्य समाज में रहकर दूसरों से संपर्क बनाता है और संबंध विकसित करता है। इससे सामाजिक एकता और सहयोग की भावना बढ़ती है।
(5) विचारों का आदान-प्रदान — संप्रेषण के माध्यम से लोग अपने विचार, भावनाएँ और अनुभव एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं। इससे आपसी समझ बढ़ती है और गलतफहमियाँ कम होती हैं।
(6) माध्यम पर आधारित प्रक्रिया — संप्रेषण के लिए किसी न किसी माध्यम की आवश्यकता होती है। जैसे भाषा, पत्र, मोबाइल, इंटरनेट या संकेत। सही माध्यम का चयन संप्रेषण को प्रभावी बनाता है।
(7) समझ पर आधारित प्रक्रिया — संप्रेषण तभी सफल माना जाता है जब प्राप्तकर्ता संदेश को सही रूप में समझ ले। केवल संदेश भेज देना पर्याप्त नहीं होता। आपसी समझ संप्रेषण की सफलता की कुंजी है।
(8) गतिशील और परिवर्तनशील प्रक्रिया — संप्रेषण समय, परिस्थिति और व्यक्ति के अनुसार बदलता रहता है। कभी औपचारिक और कभी अनौपचारिक रूप में किया जाता है। इसलिए इसे एक गतिशील प्रक्रिया कहा जाता है।
निष्कर्ष —इस प्रकार संप्रेषण मानव जीवन की एक आवश्यक और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इसके माध्यम से विचारों, भावनाओं और सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। यह सामाजिक संबंधों को मजबूत करता है और आपसी समझ को बढ़ाता है। इसलिए संप्रेषण को समाज और विकास की आधारशिला कहा जा सकता है।