अध्याय 6 : मूल निवासियों का विस्थापन ( कक्षा 11 इतिहास )

अभ्यास के प्रश्न

प्रश्न 1. दक्षिणी और उत्तर अमरीका के मूल निवासियों के बीच के अंतर पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर — उत्तर और दक्षिण अमरीका के मूल निवासियों की जीवन-शैली, आजीविका और सामाजिक संरचना में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
उत्तर अमरीका के मूल निवासी मुख्य रूप से शिकार, मछली पकड़ने और फल-कंद इकट्ठा करने पर निर्भर थे। वे स्थायी खेती नहीं करते थे और न ही अनाज का भंडारण करते थे। उनका जीवन घुमंतू (Nomadic) था। भैंस जैसे जंगली जानवर उनके भोजन, वस्त्र और परिवहन का प्रमुख साधन थे। भूमि को वे सामूहिक संपत्ति मानते थे, इसलिए भूमि स्वामित्व को लेकर विवाद नहीं होते थे। उपहार देना और मित्रता स्थापित करना उनकी संस्कृति का महत्त्वपूर्ण अंग था।
इसके विपरीत, दक्षिण और मध्य अमरीका के मूल निवासी मुख्य रूप से कृषि आधारित सभ्यताओं से जुड़े थे। मक्का उनकी प्रमुख फसल थी। यहाँ अतिरिक्त अनाज का उत्पादन हुआ, जिससे माया, एज़्टेक और इंका जैसे शक्तिशाली साम्राज्यों का विकास संभव हुआ। इन क्षेत्रों में संगठित राज्य व्यवस्था, कर प्रणाली और शासक वर्ग मौजूद था।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि उत्तर अमरीका में सरल, सामूहिक और घुमंतू जीवन था, जबकि दक्षिण अमरीका में विकसित कृषि, नगर और साम्राज्य आधारित सभ्यताएँ थीं।

प्रश्न 2. उन्नीसवीं सदी के संयुक्त राज्य अमेरिका में अंग्रेज़ी के अतिरिक्त अंग्रेज़ों के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों का वर्णन कीजिए।

उत्तर — उन्नीसवीं सदी का संयुक्त राज्य अमेरिका कई दृष्टियों से इंग्लैंड से प्रभावित था। इसलिए उसे कभी-कभी “लघु इंग्लैंड” भी कहा जाता है। अंग्रेज़ी भाषा के अतिरिक्त वहाँ अंग्रेज़ों के सामाजिक और आर्थिक जीवन की अनेक विशेषताएँ देखने को मिलती हैं।
सबसे पहले, राजनीतिक व्यवस्था में इंग्लैंड की तरह लोकतांत्रिक प्रणाली विकसित हुई। संसद, संविधान और कानून का शासन इंग्लैंड से प्रेरित था।
दूसरे, ईसाई धर्म का प्रभाव स्पष्ट था। रोमन कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट दोनों ही संप्रदाय अमेरिका में प्रचलित थे।
तीसरे, आर्थिक ढाँचा पूँजीवादी था। उद्योग, व्यापार और निजी संपत्ति को महत्त्व दिया गया, जैसा कि इंग्लैंड में था।
चौथे, रहन-सहन, खान-पान और सामाजिक आदतों में भी समानताएँ दिखाई देती हैं, जैसे शराब का सेवन।
हालाँकि समय के साथ अमेरिकी समाज ने अपनी अलग पहचान भी विकसित की, फिर भी यह कहा जा सकता है कि इंग्लैंड और अमेरिका का संबंध एक ही सिक्के के दो पहलुओं जैसा रहा।

प्रश्न 3. अमरीकियों के लिए ‘फ्रंटियर’ का क्या अर्थ था?

उत्तर — ‘फ्रंटियर’ का अर्थ अमरीकियों के लिए केवल सीमा रेखा नहीं था, बल्कि यह नए अवसरों, विस्तार और प्रगति का प्रतीक था।

संयुक्त राज्य अमेरिका की स्थापना अठारहवीं शताब्दी के अंत में हुई। प्रारंभ में यह देश अटलांटिक तट के पास एक छोटे से क्षेत्र तक सीमित था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अमेरिका का पश्चिम की ओर विस्तार शुरू हुआ, जिसे ‘फ्रंटियर मूवमेंट’ कहा गया।
इस विस्तार के अंतर्गत अमेरिका ने युद्धों और खरीद के माध्यम से विशाल क्षेत्र प्राप्त किए। लुइसियाना फ्रांस से खरीदा गया, अलास्का रूस से खरीदा गया और मेक्सिको से युद्ध कर दक्षिणी क्षेत्र हथिया लिए गए। इस प्रक्रिया में स्थानीय मूल निवासियों की राय या अधिकारों की अनदेखी की गई।
फ्रंटियर के आगे बढ़ने का अर्थ था मूल निवासियों का विस्थापन। उन्हें अपनी भूमि छोड़कर पीछे हटने को मजबूर किया गया। इस प्रकार ‘फ्रंटियर’ अमरीकी विकास का प्रतीक तो था, लेकिन मूल निवासियों के लिए यह विनाश और पीड़ा का कारण बना।

प्रश्न 4. इतिहास की पुस्तकों में ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों को लंबे समय तक क्यों शामिल नहीं किया गया?

उत्तर — ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों को लंबे समय तक इतिहास की पुस्तकों में शामिल नहीं किया गया, इसके कई कारण थे।
सबसे पहला कारण यूरोपीय लोगों का औपनिवेशिक दृष्टिकोण था। 1770 ई. में कैप्टन जेम्स कुक के आगमन के बाद अंग्रेजों ने ऑस्ट्रेलिया पर अधिकार कर लिया। प्रारंभ में संबंध सामान्य थे, लेकिन बाद में संघर्ष बढ़ गया।
दूसरा कारण यह था कि ऑस्ट्रेलिया को अपराधियों की कॉलोनी के रूप में विकसित किया गया। इंग्लैंड से भेजे गए अपराधियों और सैनिकों ने मूल निवासियों के साथ अत्याचार किए। इससे दोनों के बीच शत्रुता बढ़ी।
तीसरा कारण नस्लीय घमंड था। यूरोपीय लोग मूल निवासियों को असभ्य और पिछड़ा मानते थे, इसलिए उनके इतिहास को महत्व नहीं दिया गया।
बीसवीं सदी के मध्य तक स्थिति यही रही। लेकिन 1968 के बाद इतिहास लेखन में सुधार हुआ और मूल निवासियों को उनका उचित स्थान दिया जाने लगा।

प्रश्न 5. संग्रहालय लोगों की संस्कृति को समझाने में कितने उपयोगी होते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर — संग्रहालय किसी भी समाज की संस्कृति, सभ्यता और इतिहास को समझने का अत्यंत प्रभावी माध्यम होते हैं। संग्रहालयों में प्रदर्शित वस्तुएँ हमें अतीत के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर देती हैं।
उदाहरण के लिए, भारतीय संग्रहालयों में हड़प्पा सभ्यता के बर्तन, मुहरें, औज़ार और मूर्तियाँ प्रदर्शित हैं। इनके माध्यम से हमें वहाँ के लोगों के रहन-सहन, शिल्पकला, व्यापार और धार्मिक विश्वासों की जानकारी मिलती है।
सिक्कों के माध्यम से किसी काल की आर्थिक स्थिति, शासकों की रुचि और धार्मिक विश्वास समझे जा सकते हैं। जैसे गुप्तकालीन सिक्के उस युग की समृद्धि और कला प्रेम को दर्शाते हैं।
इस प्रकार संग्रहालय केवल वस्तुओं का संग्रह नहीं, बल्कि संस्कृति को समझने की जीवंत पाठशाला हैं।

प्रश्न 6. 1880 में कैलिफ़ोर्निया में चार व्यक्तियों की काल्पनिक बातचीत का वर्णन कीजिए।

उत्तर — 1880 में कैलिफ़ोर्निया में एक अफ्रीकी मूल का पूर्व दास, एक चीनी मज़दूर, एक जर्मन व्यापारी और होपी कबीले का एक मूल निवासी आपस में मिलते हैं।
अफ्रीकी मूल का व्यक्ति दास प्रथा के अंत के बाद स्वतंत्र जीवन जी रहा होता है। चीनी मज़दूर रेलवे निर्माण में कठिन परिश्रम कर रहा होता है। जर्मन व्यापारी गोल्ड रश के दौरान आकर समृद्ध हो चुका होता है। होपी कबीले का मूल निवासी अपने लोगों के विस्थापन और पीड़ा की बात करता है।
उनकी बातचीत से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका अवसरों की भूमि है, लेकिन यह अवसर सभी को समान रूप से नहीं मिले। यह संवाद विभिन्न समुदायों के संघर्ष, सहयोग और मानवीय संबंधों को उजागर करता है।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1. यूरोपीय लोगों के आने से पहले अमेरिका के मूल निवासियों का जीवन कैसा था?

उत्तर — यूरोपीय लोगों के आने से पहले अमेरिका के मूल निवासी प्रकृति के बहुत निकट जीवन जीते थे। उनका जीवन शिकार, मछली पकड़ने, फल-फूल एकत्र करने और सीमित खेती पर आधारित था। वे भूमि को निजी संपत्ति नहीं मानते थे बल्कि उसे सामूहिक धरोहर समझते थे। उनका समाज सरल था और आपसी सहयोग पर आधारित था। धर्म, संस्कृति और परंपराएँ प्रकृति-पूजा से जुड़ी थीं। वे जंगल, नदियों और पशुओं का सम्मान करते थे और संतुलित जीवन जीते थे।

प्रश्न 2. भूमि के विषय में मूल निवासियों और यूरोपीय लोगों की सोच में क्या अंतर था?

उत्तर — मूल निवासी भूमि को माँ के समान मानते थे। उनके लिए भूमि का स्वामित्व व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि पूरे समुदाय का होता था। इसके विपरीत यूरोपीय लोग भूमि को संपत्ति समझते थे, जिसे खरीदा-बेचा जा सकता था। यही सोच का अंतर संघर्ष का मुख्य कारण बना। यूरोपीय लोग खेती, खनन और बस्तियाँ बसाने के लिए भूमि हथियाने लगे, जिससे मूल निवासियों को अपने ही क्षेत्र से बेदखल होना पड़ा।

प्रश्न 3. ‘सभ्यता’ और ‘प्रगति’ के नाम पर मूल निवासियों के साथ क्या हुआ?

उत्तर — यूरोपीय लोगों ने स्वयं को सभ्य और मूल निवासियों को असभ्य बताया। इसी सोच के आधार पर उन्होंने मूल निवासियों की संस्कृति को नष्ट किया। उनकी भाषा, धर्म और परंपराओं को हीन माना गया। जबरन उन्हें अपने रीति-रिवाज छोड़ने पड़े। यह तथाकथित प्रगति वास्तव में उनके लिए विनाश और विस्थापन लेकर आई।

प्रश्न 4. मूल निवासियों के विस्थापन में सरकार और सेना की क्या भूमिका रही?

उत्तर — सरकारों ने यूरोपीय बसने वालों का समर्थन किया। सेना की सहायता से मूल निवासियों को उनके क्षेत्रों से हटाया गया। कई बार संधियाँ की गईं, लेकिन उन्हें तोड़ दिया गया। सेना ने बल प्रयोग कर मूल निवासियों को दूरदराज़ क्षेत्रों में भेज दिया, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक जीवन बिखर गया।


प्रश्न 5. रेलमार्गों के विस्तार का मूल निवासियों पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर — रेलमार्गों के विस्तार से यूरोपीय लोग दूर-दराज़ इलाकों तक पहुँच गए। इससे जंगल कटे, शिकार क्षेत्र नष्ट हुए और मूल निवासियों की आजीविका समाप्त हो गई। रेलमार्गों ने उनके विस्थापन की प्रक्रिया को तेज़ कर दिया और उनकी स्वतंत्र जीवन-शैली खत्म होती चली गई।

प्रश्न 6. ‘रिज़र्वेशन नीति’ क्या थी?

उत्तर — रिज़र्वेशन नीति के अंतर्गत मूल निवासियों को सीमित और अनुपजाऊ क्षेत्रों में बसाया गया। उन्हें मुख्य भूमि से अलग कर दिया गया। इन क्षेत्रों में जीवन कठिन था और वे अपनी पारंपरिक गतिविधियाँ नहीं कर सकते थे। यह नीति उनके नियंत्रण और दमन का साधन बनी।

प्रश्न 7. बीमारियों ने मूल निवासियों को कैसे प्रभावित किया?

उत्तर — यूरोपीय लोगों के साथ आई बीमारियाँ जैसे चेचक और खसरा मूल निवासियों के लिए घातक सिद्ध हुईं। उनके शरीर में इन रोगों से लड़ने की क्षमता नहीं थी। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में मूल निवासी मारे गए और उनकी जनसंख्या तेज़ी से घट गई।

प्रश्न 8. ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों का क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर — मिशनरियों ने मूल निवासियों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया। इसके कारण उनकी पारंपरिक आस्थाएँ और संस्कृतियाँ कमजोर पड़ गईं। बच्चों को मिशनरी स्कूलों में भेजकर उनकी भाषा और पहचान बदलने का प्रयास किया गया।


प्रश्न 9. मूल निवासियों की संस्कृति को बचाने के क्या प्रयास हुए?

उत्तर — 20वीं सदी में मूल निवासियों ने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन किए। उनकी भाषाओं, परंपराओं और इतिहास को संरक्षित करने के प्रयास हुए। अब कई देशों में उन्हें नागरिक अधिकार और सांस्कृतिक पहचान दी जा रही है।

प्रश्न 10. आज के समय में मूल निवासियों की स्थिति पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर — आज मूल निवासियों की स्थिति पहले से बेहतर हुई है, लेकिन समस्याएँ अभी भी बनी हुई हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार के क्षेत्र में वे पिछड़े हुए हैं। फिर भी उनकी संस्कृति और अधिकारों को मान्यता मिलने लगी है, जो एक सकारात्मक बदलाव है।

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