मैं क्यों लिखता हूँ ( अज्ञेय )/Main Kyon Likhta Hun ( Agyey )

( यहाँ NCERT की कक्षा 10वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक 'कृतिका भाग 2' में संकलित 'मैं क्यों लिखता हूँ ( अज्ञेय )' अध्याय के अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं | )

अभ्यास के प्रश्न

(मैं क्यों लिखता हूँ : अज्ञेय )

प्रश्न 1 – लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति उनके लेखन में कहीं अधिक मदद करती है, क्यों?

उत्तर – लेखक के अनुसार सच्चा लेखन भीतरी लाचारी से पैदा होता है। यह लाचारी मन के अंदर उत्पन्न हुई अनुभूति से जागती है, बाहर की घटनाओं को देखकर नहीं। जब तक लेखक का हृदय किसी अनुभव के कारण पूरी तरह उस घटना से सहानुभूति नहीं रखता और उसमें अभिव्यक्त होने की पीड़ा नहीं जागती, तब तक वह कुछ नहीं लिख पाता। लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव वह होता है, जिसे रचनाकार घटित होते हुए देखता हैं। प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से रचनाकार अनुभूति, संवेदना और कल्पना को सरलता से आत्मसात कर लेते हैं। प्रत्यक्ष अनुभव वास्तव में रचनाकार के साथ घटित नहीं होता है। वह आँखों के आगे नहीं आया होता। तभी तो अनुभव की तुलना में अनुभव को महसूस करने की क्षमता लेखक के हृदय के सारे भावों को बाहर निकालने में उसकी सहायता करती है। जब तक हृदय में अनुभव को महसूस करने की क्षमता न जागे लेखन का कार्य करना संभव नहीं है क्योंकि यही हृदय में संवेदना जगाती है और लेखन के लिए मजबूर करती है। यही कारण है कि लेखक लेखन के लिए अनुभव की अपेक्षा अनुभूति को अधिक महत्व देता है।

प्रश्न 2 – लेखक ने अपने आपको हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता कब और किस तरह महसूस किया?

उत्तर – लेखक हिरोशिमा के बम विस्फोट के परिणामों की ख़बरों को विस्तारपूर्वक अखबारों में पढ़ चुका था। जापान जाकर लेखक ने हिरोशिमा के अस्पतालों में घायल लोगों को भी देखा था। अणु-बम के प्रभाव का लेखक ने प्रत्यक्ष अनुभव किया था। एक दिन घूमते-घूमते सड़क पर एक जले हुए पत्थर पर एक लंबी उजली छाया देखी। उसे देखकर विज्ञान की अपनी जानकारी के माध्यम से लेखक सोचने लगा कि विस्फोट के समय कोई वहाँ खड़ा रहा होगा और विस्फोट से बिखरे हुए रेडियोधर्मी पदार्थ की किरणें उसमें रुक गई होंगी और बाकि आसपास से आगे बढ़ गईं होगी जिसने पत्थर को झुलसा दिया, अवरुद्ध किरणों ने आदमी को भाप बनाकर उड़ा दिया होगा। इस प्रकार पूरी दुखद घटना जैसे पत्थर पर लिखी गई है। इस प्रकार लेखक अपने आप को हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता महसूस करने लगा।

प्रश्न 3 – मैं क्यों लिखता हूँ? के आधार पर बताइए कि-
. लेखक को कौन-सी बातें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं?
. किसी रचनाकार के प्रेरणा स्रोत किसी दूसरे को कुछ भी रचने के लिए किस तरह उत्साहित कर सकते हैं?

उत्तर – लेखक को लगता है कि वह, यह जानने के लिए लिखने के लिए प्रेरित होता है कि वह आखिर लिखता क्यों है। क्योंकि लेखक के मुताबिक़ जब तक वह कुछ लिखेगा नहीं वह नहीं जान पाएगा कि लिखने के लिए उसकी क्या प्रेरणा है। स्पष्ट रूप से समझना हो तो लेखक दो कारणों से लिखता है – भीतरी लाचारी से। कभी-कभी कवि के मन में ऐसे अनुभव जाग उठते है कि वह उसे अभिव्यक्त करने के लिए व्याकुल हो उठता है।
कभी-कभी वह संपादकों के आग्रह से, प्रकाशक की माँगों से तथा आर्थिक सुविधाओं के लिए भी लिखता है। परंतु दूसरा कारण उसके लिए जरूरी नहीं है। पहला कारण अर्थात् मन की व्याकुलता ही उसके लेखन का मूल कारण बनती है।

प्रश्न 4 – कुछ रचनाकारों के लिए आत्मानुभूति/स्वयं के अनुभव के साथ-साथ बाह्य दबाव भी महत्त्वपूर्ण होता है। ये बाह्य दबाव कौन-कौन से हो सकते हैं?

उत्तर – कुछ रचनाकारों की रचनाओं में स्वयं की अनुभूति से उत्पन्न विचार और कुछ अनुभवों से प्राप्त विचारों को लिखा जाता है। इसके साथ कुछ बाह्य दबाव भी उपस्थित हो जाते हैं जिससे लेखक लिखने के लिए प्रेरित हो उठता है। ये बाह्य-दबाव निम्नलिखित हैं-
. संपादकों के आग्रह
. प्रकाशक की माँगें
. सामाजिक परिस्थितियाँ
. आर्थिक सुविधा की आकांक्षा
. विशिष्ट के पक्ष में विचारों को प्रस्तुत करने का दबाव

प्रश्न 5 – क्या बाह्य दबाव केवल लेखन से जुड़े रचनाकारों को ही प्रभावित करते हैं या अन्य क्षेत्रों से जुड़े कलाकारों को भी प्रभावित करते हैं, कैसे?

उत्तर – बाह्य दबाव केवल लेखन से जुड़े रचनाकारों को ही प्रभावित नहीं करते बल्कि बाहरी दबाव सभी प्रकार के कलाकारों को प्रेरित करते हैं। उदाहरण स्वरूप अधिकतर अभिनेता, गायक, नर्तक, कलाकार अपने दर्शकों, आयोजकों, श्रोताओं की माँग पर कला-प्रदर्शन करते हैं। बड़े-बड़े निर्माता-निर्देशक यदि उम्रदराज़ अभिनेताओं को अभिनय करने का अनुरोध न करें तो शायद उम्र हो जाने के साथ वे आराम करना चाहें। गायक, नर्तक आदि कलाकारों को भी यदि बाह्य दबाव न हों तो शायद ही वे 50-60 की उम्र के बाद काम करना चाहें।

प्रश्न 6 – हिरोशिमा पर लिखी कविता लेखक के अंतः व बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है, यह आप कैसे कह सकते हैं?

उत्तर – हिरोशिमा पर लिखी कविता, लेखक के हृदय के अनुभव से प्रस्फुटित हुए भावों और शब्दों में मानों जीवित हो उठी है। कवि ने हिरोशिमा के कारण हुए भयंकर परिणामों को अपनी आँखों से प्रत्यक्ष देखा था, घायल हुए लोगों को देखा था। उसे देखकर लेखक के मन में उनके प्रति सहानुभूति तो उत्पन्न हुई होगी। किंतु वह लेखक की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बनी। जब लेखक ने पत्थर पर मनुष्य की काली छाया को देखा तो अणु-बम के विस्फोट का भयंकर प्रतिरूप त्रासदी बनकर मन में समाने लगा। वही त्रासदी जीवंत होकर कविता में परिवर्तित हो गई। इस तरह हिरोशिमा पर लिखी कविता अंतः व् बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है।

प्रश्न 7 – हिरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानकतम दुरुपयोग है। आपकी दृष्टि में विज्ञान का दुरुपयोग कहाँ-कहाँ किस तरह से हो रहा है।

उत्तर – आजकल विज्ञान का उपयोग कम बल्कि उसका दुरुपयोग अनेक जानलेवा कामों के लिए किया जा रहा है। आज विज्ञान का गलत फायदा उठाकर आतंकवादी संसार-भर में विस्फोट कर रहे हैं। कहीं बड़ी-बड़ी इमारतों को गिराया जा रहा है। कहीं भीड़ से भारे स्थानों पर बम-विस्फोट किए जा रहे हैं। कहीं गाड़ियों में आग लगाई जा रही है। कहीं शक्तिशाली देश दूसरे देशों को दबाने के लिए उन पर आक्रमण कर रहे हैं।
विज्ञान के दुरुपयोग से ही चिकित्सक बच्चों का गर्भ में भ्रूण-परीक्षण कर रहे हैं। इससे जनसंख्या का संतुलन बिगड़ रहा है। विज्ञान के दुरुपयोग से ही किसान अपनी फसलों को बढ़ाने के लिए कीटनाशक और जहरीले रसायन छिड़ककर भूमि प्रदुषण फैला रहे हैं। इससे लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। विज्ञान के उपकरणों के गलत उपयोग के कारण ही वातावरण में गर्मी बढ़ रही है, हर प्रकार का प्रदूषण बढ़ रहा है, बर्फ पिघलने का खतरा बढ़ रहा है तथा रोज-रोज भयंकर दुर्घटनाएँ हो रही हैं।

प्रश्न 8 – एक संवेदनशील युवा नागरिक की हैसियत से विज्ञान का दुरुपयोग रोकने में आपकी क्या भूमिका है?

उत्तर – एक संवेदनशील युवा नागरिक होने के कारण विज्ञान का दुरुपयोग रोकने के लिए हमारी भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसके लिए निम्नलिखित कार्य करते हुए हम अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं –
▪️ प्रदूषण फैलाने तथा बढ़ाने वाले जितने भी कारण है जैसे – प्लास्टिक, कूड़ा-कचरा आदि के बारे में लोगों को जागरूक बनाने के लिए कार्यक्रम किए जा सकते हैं।
▪️ लोगों से अनुरोध किया जा सकता है कि पर्यावरण के लिए प्लास्टिक जैसी हानिकारक वस्तुओं का उपयोग न करें ।
▪️विज्ञान के बनाए हथियारों का प्रयोग यथासंभव मानवता की भलाई के लिए ही करें, मनुष्यों के विनाश के लिए नहीं।
▪️ विज्ञान की चिकित्सीय खोज का दुरुपयोग न करें।
▪️सामाजिक विषमता तथा लिंगानुपात में असमानता के बारे में आम जनता का जागरूक करने का प्रयास किया जा सकता है।
▪️ टी.वी. पर प्रसारित अश्लील कार्यक्रमों का खुलकर विरोध करना चाहिए। धार्मिक व् आध्यात्मिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए।
▪️समाज के लिए उपयोगी कार्यक्रमों के प्रसारण करना चाहिए।
विज्ञान के दुरुपयोग के परिणामों को बताकर लोगों को जागरूक बनाने में योगदान दे सकते हैं |

यह भी पढ़ें :

▪️हिंदी ( कक्षा 10) — क्षितिज भाग 2 और कृतिका भाग 2

▪️हिंदी ( कक्षा 9) — क्षितिज भाग 1 और कृतिका भाग 1

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