स्कोप्स मॉडल (Skopos Theory) की अनुवाद में भूमिका

स्कोप्स मॉडल (Skopos Theory) क्या है? यह अनुवाद निर्णय को कैसे प्रभावित करता है?

स्कोप्स सिद्धांत (Skopos Theory) अनुवाद अध्ययन का एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली सिद्धांत है, जिसे जर्मन विद्वान हांस जे. वर्मेयर (Hans J. Vermeer) ने 1970–80 के दशक में विकसित किया। “स्कोप्स” शब्द यूनानी भाषा के शब्द skopos से लिया गया है, जिसका अर्थ है—उद्देश्य (Purpose/Goal)। इस सिद्धांत के अनुसार अनुवाद का प्रमुख उद्देश्य केवल मूल पाठ के शब्दों या वाक्यों को दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुत करना नहीं है, बल्कि अनुवाद के लक्ष्य, उद्देश्य और पाठक-समूह की अपेक्षाओं को पूरा करना है। अतः अनुवाद की गुणवत्ता केवल भाषा की समानता से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि अनुवाद अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में कितना सफल है।

स्कोप्स मॉडल का मूल सिद्धांत

स्कोप्स सिद्धांत कहता है कि अनुवादक का पहला कार्य यह तय करना है कि अनुवाद का उद्देश्य क्या है—क्या वह सूचना देना चाहता है, मनोरंजन करना चाहता है, किसी कानूनी या आधिकारिक बात को स्पष्ट करना चाहता है, किसी विज्ञापन के माध्यम से ग्राहकों को आकर्षित करना चाहता है, या सांस्कृतिक भाव जगाना चाहता है। उद्देश्य स्पष्ट होने पर अनुवादक भाषा, शैली, शब्द–चयन और संरचना के निर्णय उसी आधार पर लेता है।

उदाहरण के लिए कानूनी दस्तावेज, शपथपत्र, मेडिकल रिपोर्ट आदि में शब्दशः और अत्यंत सटीक अनुवाद आवश्यक है क्योंकि थोड़ी–सी त्रुटि अर्थ बदल सकती है।

विज्ञापन, फ़िल्म संवाद, कविता, भाषण आदि में भावानुवाद या रचनात्मक अनुवाद अधिक उपयुक्त होता है, ताकि भावनात्मक प्रभाव मजबूत हो।

स्कोप्स सिद्धांत अनुवाद निर्णय को कैसे प्रभावित करता है?

  1. लक्ष्य और पाठक पर ध्यान केंद्रित

अनुवादक यह सोचकर निर्णय लेता है कि लक्ष्य भाषा के पाठक कौन हैं—बच्चे, विशेषज्ञ, आम जनता, ग्राहक या शोधकर्ता। उदाहरण के रूप में बच्चों के लिए विज्ञान विषय का अनुवाद सरल, कहानीनुमा और हल्की भाषा में होगा, जबकि शोधार्थियों के लिए वही विषय तकनीकी और विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

  1. उद्देश्य के अनुसार अनुवाद की रणनीति में बदलाव

अगर लक्ष्य केवल जानकारी प्रदान करना है, तो शाब्दिक अनुवाद उपयुक्त होता है; लेकिन यदि लक्ष्य पाठकों को प्रभावित करना है, तो रचनात्मक अनुवाद प्रभावी होगा। उदाहरण—
English slogan: “Impossible is Nothing”
सीधा अनुवाद: “असंभव कुछ नहीं है”
रचनात्मक विज्ञापन अनुवाद: “नामुमकिन भी मुमकिन!”
यह अनुवाद प्रभावशाली है क्योंकि इसका उद्देश्य भावनात्मक रूप से प्रेरित करना है।

  1. सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भों का चयन

कई बार अनुवादक को निर्णय लेना पड़ता है कि स्रोत संस्कृति को ज्यों का त्यों रखा जाए या लक्ष्य संस्कृति के अनुरूप अनुकूलन किया जाए। जैसे—
Thanksgiving का अनुवाद
शाब्दिक: “धन्यवाद दिवस”
सांस्कृतिक अनुकूलन: “कृतज्ञता का पर्व”
यह निर्णय इस बात पर आधारित होगा कि पाठक किस सांस्कृतिक संदर्भ में इसे समझेंगे।

  1. अनुवादक की भूमिका विशेषज्ञ निर्णयकर्ता के रूप में

स्कोप्स सिद्धांत यह मानता है कि अनुवादक किसी दास या यांत्रिक भाषा-परिवर्तक की तरह काम नहीं करता, बल्कि वह एक संचार विशेषज्ञ होता है, जिसे उद्देश्य के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी दोनों होती है।

5.पाठ के अनुसार अनुवाद शैली

स्कोप्स सिद्धांत बताता है कि हर प्रकार के पाठ की विशेष शैली और अनुवाद दृष्टिकोण अलग होता है, जो उसके उद्देश्य पर निर्भर करता है। यदि पाठ वैज्ञानिक, तकनीकी या कानूनी है, तो शब्दशः और सटीक अनुवाद का पालन किया जाता है, क्योंकि तथ्य और अर्थ में परिवर्तन स्वीकार्य नहीं। वहीं साहित्यिक कथा, कविता, नाटक और फ़िल्म संवाद जैसे पाठ भावनात्मक या कलात्मक प्रभाव उत्पन्न करने के लिए लिखे जाते हैं, इसलिए उनका अनुवाद भावानुवाद, व्याख्यात्मक या रचनात्मक शैली में किया जाता है। इसके विपरीत, विज्ञापन और मार्केटिंग सामग्री का उद्देश्य लोगों को आकर्षित करना, प्रेरित करना और खरीद को बढ़ावा देना होता है, इसलिए उनमें अनुकूलन (adaptation) और पुनर्सृजन (transcreation) का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार अनुवाद शैली पाठ के प्रकार, उद्देश्य और पाठक की प्रकृति के अनुसार बदलती है, जो स्कोप्स सिद्धांत का मूल आधार है।

अतः स्पष्ट है कि स्कोप्स सिद्धांत अनुवाद को केवल भाषा-परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं मानता, बल्कि उद्देश्य-आधारित संचार के रूप में देखता है। यह अनुवादक को यह स्वतंत्रता देता है कि वह अनुवाद रणनीति इस आधार पर चुने कि अनुवाद का लक्ष्य क्या है और पाठक की आवश्यकता क्या है। इसलिए अनुवाद की सफलता का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होता है कि क्या अनुवाद अपने उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा करता है, न कि केवल इससे कि शब्द कितने समान हैं।

यह भी पढ़ें :

▪️अनुवाद कला / अनुवाद सिद्धांत ( महत्त्वपूर्ण प्रश्न )

Leave a Comment

error: Content is proteced protected !!