भारत की लिपियों का परिचय

भारत की प्रमुख लिपियों का परिचय

ब्राह्मी लिपि

ब्राह्मी लिपि भारत की सबसे पुरानी लिपि है, जो तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से मिलती है।
यह सम्राट अशोक के शिलालेखों में इस्तेमाल हुई और ज्यादातर भारतीय लिपियों की माँ मानी जाती है।
. ब्राह्मी बाएँ से दाएँ लिखी जाती है और इसमें स्वर तथा व्यंजन के चिह्न होते हैं।
. यह अबुगिडा प्रकार की है, मतलब व्यंजनों में स्वर अपने आप जुड़े रहते हैं।
. उत्तर में गुप्त लिपि और दक्षिण में तमिल-ब्राह्मी इससे निकली।
. प्राकृत, पाली और संस्कृत भाषाओं के लिए यह काम आई।
. आज पुरातत्व में यह इतिहास समझने के लिए जरूरी है।

देवनागरी लिपि

देवनागरी लिपि उत्तर भारत की मुख्य लिपि है, जो सातवीं शताब्दी से चली आ रही है।
यह हिंदी, संस्कृत, मराठी और नेपाली भाषाओं की सरकारी लिपि है।
. देवनागरी बाएँ से दाएँ लिखी जाती है, इसमें 14 स्वर और 33 व्यंजन हैं।
. इसकी खासियत ऊपर की शिरोरेखा है जो अक्षरों को जोड़ती है।
. यह अबुगिडा है यानी व्यंजनों पर मात्राएँ लगती हैं।
. वेद, पुराण और आज की किताबों में इसका बहुत इस्तेमाल होता है।
. कंप्यूटर में यूनिकोड की वजह से यह आसानी से डिजिटल हो गई है।

गुरुमुखी लिपि

गुरुमुखी लिपि पंजाबी भाषा की लिपि है जो सोलहवीं शताब्दी में गुरु अंगद देव जी ने बनाई। ‘गुरुमुखी’ नाम “गुरु के मुँह से” है। पंजाब और सिखों में आज भी यह बहुत प्रचलित है।
. यह सिखों के गुरु ग्रंथ साहिब की मूल लिपि है।
. गुरुमुखी बाएँ से दाएँ लिखी जाती है और देवनागरी से मिलती-जुलती है।
. इसमें स्वर और व्यंजन मिलाकर कुल 35 अक्षर हैं |
. यह भी अबुगिडा है यानी इसमें भी स्वरों की मात्राओं का इस्तेमाल होता है।

बंगला (असमीया) लिपि

बंगला लिपि बंगाली और असमीया भाषाओं की लिपि है जो ग्यारहवीं शताब्दी में शुरू हुई। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संपन्न बनाया। बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में सरकारी लिपि है।
. यह ब्राह्मी से निकली और पूर्वी भारत की बड़ी लिपि है।
. बंगला बाएँ से दाएँ लिखी जाती है और गोल आकार की है।
. इसमें 11 स्वर और 39 व्यंजन हैं, संयुक्त अक्षरों की अधिकता है।
. यह अबुगिडा प्रकार की है | इसमें शिरोरेखा नहीं है लेकिन मात्राएँ जुड़ी रहती हैं।

तेलुगु लिपि

तेलुगु लिपि आंध्र और तेलंगाना की मुख्य लिपि है जो छठी शताब्दी से प्रचलित है।
यह दक्षिणी ब्राह्मी से बनी और तेलुगु-कन्नड़ समूह की है। पुराने शिलालेखों और कविताओं में इस्तेमाल हुई। यह फिल्मों और इंटरनेट पर बहुत लोकप्रिय है।
. इसमें 16 स्वर, 41 व्यंजन और कुछ विशेष चिह्न हैं।
. तेलुगु बाएँ से दाएँ लिखी जाती है, घुमावदार रेखाओं वाली सुंदर लिपि है।
. यह भी अबुगिडा है यानी इसमें भी व्यंजनों में स्वर जुड़े होते हैं।

तमिल लिपि

तमिल लिपि तमिलनाडु और श्रीलंका की पुरानी लिपि है | इसका चलना दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से माना जाता है । संगम साहित्य और तिरुक्कुरल इसमें लिखे गए।
आधुनिक समय में इसे सरल बनाया गया है।
. यह तमिल-ब्राह्मी से बनी है और द्रविड़ भाषाओं की सबसे पुरानी लिपि है।
. तमिल बाएँ से दाएँ लिखी जाने वाली सरल गोल अक्षरों वाली लिपि है |
. इसमें 12 स्वर, 18 व्यंजन और एक विशेष चिह्न (आय्थम) है।
. यह भी अबुगिडा है लेकिन व्यंजन कम होने से अपेक्षाकृत आसान है।

कन्नड़ लिपि

कन्नड़ लिपि कर्नाटक की राजकीय लिपि है जो चौथी शताब्दी से चली आ रही है।
यह तेलुगु से संबद्ध है और दक्षिणी ब्राह्मी से निकली है।
. कन्नड़ बाएँ से दाएँ लिखी जाती है ।
. इसमें 14 स्वर और 34 व्यंजन हैं | कुछ संयुक्त अक्षर भी हैं।
. यह अबुगिडा है, कविता और शिलालेखों के लिए अच्छी है।
. पुरानी कन्नड़ से आज की कन्नड़ तक इसमें अनेक बदलाव आये हैं ।

मलयालम लिपि

मलयालम लिपि केरल की मुख्य लिपि है | आधुनिक मलयालम का चलना 16वीं सदी से माना जाता है जो ‘ग्रैंड लिपि’ से विकसित हुई ।
. यह तमिल और संस्कृत का मिश्रण है।
. मलयालम बाएँ से दाएँ लिखी जाती है | इसमें अक्षरों की संरचना गोल है।
. इसमें 15 स्वर, 36 व्यंजन और कई संयुक्त चिह्न हैं | . यह भी अबुडिगा है लेकिन सरल है।
. आदि भाषा और रामचरितम जैसे ग्रंथ इसमें हैं।

ओड़िया लिपि

ओड़िया ( उड़िया ) लिपि उड़ीसा की सरकारी लिपि है जिसका चलन दसवीं शताब्दी से मिलता है। उड़ीसा में आज भी लोकप्रिय है |
. यह बंगला से मिलती है लेकिन ब्राह्मी से निकली है।
. ओड़िया / उड़िया बाएँ से दाएँ लिखी जाती है और इसकी बनावट आधी गोल छतरी जैसी है।
. इसमें 11 स्वर और 37 व्यंजन हैं।
. यह भी अबुगिडिगा है।

गुजराती लिपि

गुजराती लिपि गुजरात की मुख्य लिपि है जिसका निर्माण सोलहवीं शताब्दी में देवनागरी से हुआ । कालांतर में व्यापारियों ने इसे सरल बनाया।
. गुजराती बाएँ से दाएँ लिखी जाती है | इसमें शिरोरेखा नहीं होती।
. इसमें 13 स्वर और 34 व्यंजन हैं | . यह भी अबुडिगा है |

यह भी देखें :

▪️आधुनिक गद्य साहित्य B 23 – HIN- 301( प्रमुख प्रश्न )

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