समाचार : अर्थ, तत्त्व ( विशेषताएँ ) और लेखन शैली ( उलटा पिरामिड शैली )

समाचार वह सूचना होती है जो किसी ताज़ा, महत्वपूर्ण, रोचक या जन-सामान्य को प्रभावित करने वाली घटना के बारे में बताती है। यह वह जानकारी है जो जनता को देश, दुनिया, समाज, राजनीति, खेल, विज्ञान, व्यापार, मनोरंजन आदि से जुड़े हालिया घटनाक्रमों से अवगत कराती है।

सरल शब्दों में —

“समाचार वह सूचना है जो नवीन, सत्य, प्रासंगिक और जनहित से जुड़ी होती है |”

समाचार की विशेषताएँ

(1) नवीनता (ताजगी): समाचार वह होता है जो हाल ही में हुआ हो। पुरानी घटना सूचना बन जाती है, समाचार नहीं।

(2) सार्वजनिक महत्व: वह घटना समाचार बनती है जो आम लोगों को प्रभावित करे या उनकी रुचि का हो।

(3) वस्तुनिष्ठता: समाचार में निष्पक्षता और तथ्यों की सटीकता जरूरी होती है; इसमें कल्पना या राय नहीं होनी चाहिए।

(4) रोचकता: जो खबर लोगों को आकर्षित करे, जिसमें उत्सुकता हो।

(5) सत्यता: झूठा या भ्रामक समाचार, समाचार नहीं कहलाता – वह अफवाह हो सकता है।

समचार कैसे लिखा जाता है

समाचार लेखन एक तथ्यात्मक, संक्षिप्त और स्पष्ट शैली है जिसका उद्देश्य पाठक या दर्शक को तुरंत और सटीक जानकारी देना होता है। एक अच्छा समाचार लेख उलटा पिरामिड शैली में लिखा जाता है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण जानकारी पहले दी जाती है और कम महत्वपूर्ण विवरण बाद में आते हैं। उलटा पिरामिड शैली के तीन भाग होते हैं — इंट्रो, बॉडी तथा समापन |

(1) इंट्रो (Intro) / मुखड़ा / प्रस्तावना या लीड

यही समाचार का सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक हिस्सा होता है।

इसमें पाठक को तुरंत यह जानकारी मिल जाती है कि क्या हुआ, कब, कहाँ, और किसके साथ। इसे ही इंट्रो या लीड पैराग्राफ कहते हैं।

इसमें 5W और 1H (What, Who, When, Where, Why, How) में से कम-से-कम 3 उत्तर जरूर देने चाहिए। इसके लिए हिंदी में छः ककार – क्या, कौन, कब, कहाँ, क्यों और कैसे का प्रयोग किया जाता है |

उदाहरण: मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में बुधवार सुबह एक निजी बस और ट्रक की टक्कर में 8 लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। हादसा नेशनल हाईवे-69 पर हुआ।

(2) बॉडी (Body) — मुख्य विवरण

इंट्रो में बताई गई घटना की विस्तृत जानकारी इस भाग में दी जाती है।

इस भाग में क्या हुआ, कैसे हुआ, कितने बजे हुआ, कौन-कौन शामिल थे – इन सभी का क्रमवार विवरण दिया जाता है | इसमें चश्मदीद गवाहों, पुलिस या डॉक्टर की राय, आँकड़े, और पृष्ठभूमि की जानकारी भी शामिल की जाती है।

अगर पहले भी ऐसी घटना हो चुकी है तो उसका विवरण भी दिया जा सकता है।

उदाहरण: यह हादसा उस समय हुआ जब बस छिंदवाड़ा से नागपुर जा रही थी। तेज़ रफ्तार ट्रक ने सामने से आकर बस को टक्कर मार दी। स्थानीय लोगों ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुँचाया। पुलिस ने ट्रक ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है।

समापन ( Conclusion) / निष्कर्ष

यह भाग बताता है कि अब क्या हो रहा है या आगे क्या हो सकता है। इस भाग में प्रशासनिक कार्यवाही, सरकारी सहायता या अभी की स्थिति का उल्लेख होता है।

कभी-कभी इसमें जनता की प्रतिक्रिया, आंदोलन या स्थिति के सुधार की उम्मीद भी जोड़ी जाती है।

उदाहरण: मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। घायलों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है जिनमें से 4 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

2 thoughts on “समाचार : अर्थ, तत्त्व ( विशेषताएँ ) और लेखन शैली ( उलटा पिरामिड शैली )”

Leave a Comment

error: Content is proteced protected !!