पत्रकारिता के मूल / अनिवार्य या आवश्यक तत्त्व


पत्रकारिता केवल घटनाओं को इकट्ठा करने और उन्हें छापने या दिखाने का नाम नहीं है। यह एक ज़िम्मेदार और संवेदनशील पेशा है, जिसकी इमारत कुछ निश्चित सिद्धांतों की नींव पर खड़ी होती है। एक ‘आदर्श पत्रकारिता’ के लिए निम्नलिखित मूल तत्त्वों का होना अत्यंत आवश्यक है:

1. सत्यता

पत्रकारिता का पहला और सबसे बड़ा तत्त्व सत्य है।

  • एक पत्रकार का सबसे बड़ा धर्म है कि वह जो भी खबर दे, वह पूरी तरह सच और प्रामाणिक तथ्यों पर आधारित हो।
  • सुनी-सुनाई बातों, अफवाहों या बिना जांचे-परखे किसी भी सूचना को समाचार का रूप नहीं देना चाहिए। सत्य ही पत्रकारिता की असली ताकत है।

2. निष्पक्षता

पत्रकारिता में किसी के साथ भेदभाव या पक्षपात की कोई जगह नहीं होती।

  • एक पत्रकार को हमेशा तटस्थ रहना चाहिए। किसी भी विवाद में उसे अपनी व्यक्तिगत राय या पसंद-नापसंद को शामिल किए बिना, ‘सिक्के के दोनों पहलू’ जनता के सामने रखने चाहिए।
  • जो घटना जैसी घटी है, उसे ठीक वैसा ही प्रस्तुत करना एक निष्पक्ष पत्रकारिता की पहचान है।

3. नवीनता

अंग्रेजी में कहावत है— “News is what is new” (समाचार वही है जो नया है)।

  • पत्रकारिता में समय का बहुत महत्त्व है। कल की खबर आज बासी हो जाती है।
  • घटना के तुरंत बाद उसे सबसे पहले जनता तक पहुँचाना पत्रकारिता का एक बहुत ही आवश्यक तत्त्व है।

4. स्पष्टता

पत्रकारिता साहित्य नहीं है, इसलिए इसमें बहुत कठिन या काव्यात्मक भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए।

  • समाचार की भाषा सीधी, स्पष्ट और आम बोलचाल वाली होनी चाहिए।
  • खबर ऐसे लिखी या बोली जानी चाहिए कि एक साधारण या कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी उसे एक बार में आसानी से समझ सके।

5. संक्षिप्तता

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में किसी के पास बहुत लंबे और उबाऊ लेख पढ़ने का समय नहीं है।

  • “कम से कम शब्दों में पूरी और सही बात कह देना” पत्रकारिता का एक बड़ा गुण है।
  • खबर ‘टू-द-पॉइंट’ (To the point) होनी चाहिए। फालतू बातों से खबर का मूल प्रभाव खत्म हो जाता है।

6. जन-रुचि

पत्रकारिता हवा में नहीं होती, यह जनता के लिए होती है।

  • पत्रकारिता में उन ख़बरों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जिनका असर समाज के एक बड़े हिस्से पर पड़ता हो (जैसे- महँगाई, रोज़गार, या नए नियम)।
  • जिन ख़बरों से आम आदमी का सीधा जुड़ाव होता है, दर्शक और पाठक उन्हें सबसे ज्यादा पसंद करते हैं।

7. जवाबदेही

पत्रकारिता एक बड़ी ताकत है, और बड़ी ताकत के साथ बड़ी ज़िम्मेदारी भी आती है।

  • एक पत्रकार और मीडिया संस्थान हमेशा अपने पाठकों और दर्शकों के प्रति जवाबदेह होते हैं।
  • यदि अनजाने में कोई गलत खबर छप जाए, तो उसे छिपाने के बजाय तुरंत अपनी गलती स्वीकार करना और अगले दिन उसका सुधार (Correction) छापना ज़िम्मेदार पत्रकारिता का सबसे बड़ा तत्त्व है।

निष्कर्ष

निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि सत्यता, निष्पक्षता, नवीनता और स्पष्टता जैसे तत्त्व ही पत्रकारिता की आत्मा हैं। यदि किसी समाचार में से सत्यता और निष्पक्षता को निकाल दिया जाए, तो वह केवल एक ‘अफवाह’ बनकर रह जाएगा। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारिता तभी तक मज़बूत और विश्वसनीय है, जब तक वह अपने इन मूल तत्त्वों का पूरी ईमानदारी के साथ पालन करती है।

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