श्रवण संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति सामने वाले की बात को ध्यानपूर्वक सुनकर उसका अर्थ समझता है। इसमें केवल कानों से सुनना ही नहीं, बल्कि मन और बुद्धि से समझना भी शामिल होता है। प्रभावी श्रवण से संदेश का सही अर्थ ग्रहण किया जा सकता है। यह संप्रेषण को सफल और सार्थक बनाता है। श्रवण की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिना अच्छे सुनने के कोई भी संवाद पूर्ण नहीं हो सकता।
श्रवण में आने वाली बाधाएँ
(1) ध्यान की कमी — जब श्रोता का ध्यान वक्ता की बात पर नहीं होता, तो संदेश ठीक से समझ में नहीं आता। मन कहीं और भटकता रहता है। इससे महत्वपूर्ण जानकारी छूट जाती है। यह श्रवण संप्रेषण की सबसे सामान्य बाधा है।
(2) शारीरिक थकान — थकान होने पर व्यक्ति ठीक से सुन नहीं पाता। नींद, कमजोरी या अस्वस्थता श्रवण क्षमता को प्रभावित करती है। ऐसे में मन एकाग्र नहीं रह पाता। इससे संदेश अधूरा या गलत समझा जा सकता है।
(3) शोर और बाहरी व्यवधान — आस-पास का शोर श्रवण में बड़ी बाधा बनता है। जैसे वाहन का शोर, भीड़, मशीनों की आवाज़। इससे वक्ता की बात स्पष्ट सुनाई नहीं देती। परिणामस्वरूप संदेश का अर्थ बिगड़ सकता है।
(4) भावनात्मक पूर्वाग्रह — यदि श्रोता के मन में वक्ता के प्रति नकारात्मक भावना हो, तो वह ध्यान से नहीं सुनता। गुस्सा, ईर्ष्या या घृणा समझ को प्रभावित करती है। इससे निष्पक्ष श्रवण नहीं हो पाता। यह संवाद में दूरी पैदा करता है।
(5) भाषा और शब्दावली की कठिनाई — कठिन भाषा या अपरिचित शब्द सुनने में बाधा बनते हैं। श्रोता अर्थ समझने में उलझ जाता है। इससे मूल संदेश छूट सकता है। सरल भाषा न होने पर श्रवण प्रभावी नहीं रहता।
(6) जल्द निष्कर्ष निकालना — कई बार श्रोता पूरी बात सुने बिना ही निष्कर्ष निकाल लेता है। इससे संदेश का पूरा अर्थ समझ में नहीं आता। गलत धारणाएँ बन जाती हैं। यह प्रभावी श्रवण में बड़ी बाधा है।
(7) मानसिक तनाव और चिंता — तनावग्रस्त मन किसी बात को ठीक से नहीं सुन पाता। चिंता के कारण ध्यान भंग रहता है। श्रोता अंदरूनी विचारों में उलझा रहता है। इससे संप्रेषण असफल हो सकता है।
(8) सुनने की शारीरिक समस्या — कान से संबंधित समस्याएँ श्रवण में बाधा बनती हैं। कम सुनाई देना या दर्द होना संदेश ग्रहण करने में कठिनाई पैदा करता है। इससे संप्रेषण प्रभावित होता है। यह बाधा शारीरिक कारणों से उत्पन्न होती है।
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