व्यक्तित्व का अर्थ (Meaning of Personality)
‘व्यक्तित्व’ को अंग्रेजी में Personality कहते हैं, जो लैटिन शब्द ‘Persona’ (परसोना) से बना है। प्राचीन काल में इसका अर्थ ‘नकाब’ या ‘मुखौटा’ होता था जिसे नाटक के पात्र पहनते थे। साधारण शब्दों में, व्यक्तित्व केवल व्यक्ति का बाहरी रूप या रंग-रूप नहीं है, बल्कि उसके शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक गुणों का एक मिला-जुला रूप है। इसमें व्यक्ति की सोचने की शक्ति, व्यवहार और दूसरों के साथ उसके संबंध बनाने का तरीका शामिल होता है।
व्यक्तित्व की परिभाषाएं ( Definitions of Personality)
- जी. डब्ल्यू. ऑलपोर्ट (Allport) के अनुसार: “व्यक्तित्व व्यक्ति के भीतर उन मनो-शारीरिक तंत्रों का वह गतिशील संगठन है, जो वातावरण के साथ उसका अपूर्व समायोजन निर्धारित करता है।”
- मोर्टन प्रिंस (Morton Prince) के अनुसार: “व्यक्तित्व व्यक्ति की उन सभी जन्मजात (जो जन्म से हों) और अर्जित (जो बाद में सीखी गई हों) प्रवृत्तियों, इच्छाओं और भावनाओं का योग है।”
व्यक्तित्व की विशेषताएं
(Characteristics of Personality)
(1) व्यक्तित्व समग्र रूप होता है — व्यक्तित्व केवल बाहरी रूप नहीं होता, बल्कि व्यक्ति के विचार, भावनाएँ, व्यवहार और आदतें मिलकर बनता है। इसलिए व्यक्तित्व को पूरे व्यक्ति के रूप में समझा जाता है। यह कई गुणों का संयुक्त रूप होता है।
(2) व्यक्तित्व प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न होता है — हर व्यक्ति का व्यक्तित्व अलग होता है। किसी के विचार, स्वभाव और व्यवहार दूसरे से मेल नहीं खाते। यही कारण है कि सभी लोग एक जैसे नहीं होते।
(3) व्यक्तित्व गतिशील होता है — व्यक्तित्व स्थिर नहीं रहता, बल्कि समय के साथ बदलता रहता है। अनुभव, शिक्षा और वातावरण से इसमें परिवर्तन आता है। व्यक्ति सीखते हुए अपने व्यक्तित्व को विकसित करता है।
(4) व्यक्तित्व जन्मजात और अर्जित गुणों का मिश्रण है — व्यक्तित्व में कुछ गुण जन्म से मिलते हैं और कुछ समाज व अनुभव से विकसित होते हैं। जैसे स्वभाव जन्मजात हो सकता है, पर व्यवहार सीखकर सुधारा जा सकता है। दोनों मिलकर व्यक्तित्व बनाते हैं।
(5) व्यक्तित्व व्यवहार में प्रकट होता है — व्यक्तित्व को व्यक्ति के कार्य, बोलचाल और व्यवहार से पहचाना जाता है। किसी के स्वभाव और सोच का पता उसके आचरण से चलता है। इसलिए व्यक्तित्व केवल मन में नहीं, व्यवहार में दिखता है।
(6) व्यक्तित्व वातावरण से प्रभावित होता है — परिवार, विद्यालय, समाज और मित्र व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं। अच्छा वातावरण अच्छे गुणों को बढ़ाता है। वातावरण व्यक्ति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
(7) व्यक्तित्व निरंतर विकास की प्रक्रिया है — व्यक्तित्व जीवन भर विकसित होता रहता है। अनुभव और सीख के साथ व्यक्ति परिपक्व बनता है। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
निष्कर्ष : इस प्रकार स्पष्ट होता है कि व्यक्तित्व केवल बाहरी रूप या बोलचाल तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति के विचार, भावनाओं, व्यवहार और अनुभवों का समग्र रूप है। व्यक्तित्व प्रत्येक व्यक्ति में अलग होता है और समय के साथ विकसित होता रहता है। जन्मजात गुण और सामाजिक वातावरण दोनों मिलकर व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। इसलिए अच्छे व्यक्तित्व के विकास के लिए सकारात्मक सोच, उचित वातावरण और निरंतर प्रयास आवश्यक