संगतकार ( मंगलेश डबराल )/ Sangatkaar ( Manglesh Dabral )

( यहाँ NCERT की कक्षा 10वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘क्षतिज भाग 2’ में संकलित ‘संगतकार ( मंगलेश डबराल )’ अध्याय के मूल पाठ तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | )

संगतकार ( मूल पाठ व व्याख्या )

(1)

मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का साथ देती
वह आवाज सुंदर कमजोर काँपती हुई थी
वह मुख्य गायक का छोटा भाई है
या उसका शिष्य
या पैदल चलकर सीखने आने वाला दूर का कोई रिश्तेदार
मुख्य गायक की गरज में
वह अपनी गूँज मिलाता आया है प्राचीन काल से

व्याख्या– संगीत कार्यक्रम में मुख्य गायक का स्वर ही प्रधान होता है। उसके स्थिर-गम्भीर स्वर में उसके सहायक संगतकार अपना सुंदर किन्तु अपरिपक्व स्वर मिलाते हैं। यह संगतकार गायक का कोई निकट संबंधी या कृपापात्र हो सकता है। वह गायक का छोटा भाई, शिष्य या फिर कोई निर्धन किन्तु लगनशील संबंधी हो सकता है जो पैदल चलकर संगीत की शिक्षा लेने आया है। पुराने समय से ही संगतकार का स्वर मुख्य गायक के ऊँचे गम्भीर स्वर के साथ कर गूंजता रहा है।

(2)

गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में खो चुका होता है
या अपने ही सरगम को लाँघकर
चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में
तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है
जैसा समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान
जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन
जब वह नौसिखिया था

व्याख्या– जब गायक गीत के अगले चरणों को गाता है और आलाप तथा तानों के कौशल को प्रदर्शित करते हुए अपने सप्तक की सीमा लाँघ जाता है और अनहद नाद से एकाकार होने लगता है, मूल संगीत से दूर चला जाता है, तब संगतकार ही उसे स्थायी पंक्ति को स्मरण कराता है । जैसे वह गायक के पीछे छूट गए सामान को सँभाल रहा हो ।

(3)

तारसप्तक में जब बैठने लगता है

उसका गला प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज से राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढाँढ़स बंधाता
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर कभी-कभी वह यों ही दे देता है
उसका साथ यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है
और यह कि फिर से गाया जा सकता है
गाया जा चुका राग

व्याख्या — जब गायक उच्च स्वर में गायन करता है तो कभी-कभी गाते-गाते उसका गला बैठने लगता है इससे उसकी गाने की प्रेरणा और उत्साह समाप्त से होने लगते हैं। स्वर तेज मंद पड़ने लगता है तब संगतकार का स्वर उसे अपार सांत्वना प्रदान करता है। उसके डूबे आत्मविश्वास को नवजीवन प्रदान करता है। कभी-कभी अकारण भी वह गायक की संगत करता है मानो उसे आश्वस्त कर रहा हो कि वह अपने को अकेला न समझे वह उसके साथ है। वह गायक को विश्वास दिलाता है कि वह चाहे तो गाए जा चुके राग को फिर गा सकता है ।

(4)

और उसकी आवाज में जो एक हिचक साफ सुनाई देती है
या अपने स्वर को ऊंचा न उठाने की जो कोशिश है
उसे विफलता नहीं
उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए

व्याख्या – उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि जब भी संगतकार मुख्य गायक के स्वर में अपना स्वर मिलता है यानि उसके साथ गाना गाता है तो उसकी आवाज में एक संकोच साफ सुनाई देता है। और उसकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि उसकी आवाज मुख्य गायक की आवाज से धीमी रहे। अर्थात उसका स्वर भूल कर भी मुख्य गायक के स्वर से ऊँचा न हो जाए इसका ध्यान वह बहुत अच्छे से रखता है। लेकिन हमें इसे संगतकार की कमजोरी या असफलता नही माननी चाहिए क्योंकि वह मुख्य गायक के प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिए ऐसा करता है। कहने का तात्पर्य यह है कि अपना स्वर ऊँचा कर वह मुख्य गायक के सम्मान को ठेस नही पहुँचाना चाहता है। यह उसका मानवीय गुण हैं।

अभ्यास के प्रश्न

( संगतकार : मंगलेश डबराल)

प्रश्न 1. संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है ?

    उत्तर — संगतकार के माध्यम से कवि किसी भी कार्य अथवा कला में लगे सहायक कर्मचारियों और कलाकारों की ओर संकेत करना चाह रहा है। सहायक कलाकार अपनी प्रसिद्धि की परवाह किए बिना मुख्य कलाकार के महत्व को बढ़ाने का कार्य करते हैं|

    प्रश्न 2. संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं ?

      उत्तर — संगतकार जैसे व्यक्ति निम्नलिखित क्षेत्रों में मिलते हैं; जैसे –

      • सिनेमा के क्षेत्र में – फिल्म में अनेकों सह कलाकार और स्टंटमैन|
      • नृत्य के क्षेत्र में – अन्य सह नर्तक|
      • भवन निर्माण क्षेत्र में -मज़दूर|
      • राजनीति के क्षेत्र में – सहायक उपनेता और कार्यकर्ता|

      प्रश्न 3. संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं?

        उत्तर — संगतकार निम्नलिखित रूपों में संगतकार की मदद करते हैं –

        • वे अपनी आवाज़ और गूँज को मुख्य गायक की आवाज़ में मिलाकर उनकी आवाज़ का बल बढ़ाने का काम करते हैं|
        • जब मुख्य गायक गायन की गहराई में चले जाते हैं तब वे स्थायी पंक्ति को पकड़कर मुख्य गायक को वापस मूल स्वर में लाते हैं|
        • वे मुख्य गायक की थकी, टूटती-बिखरती आवाज़ को बल देकर उसे अकेला होने या बिखरने से बचाते हैं|

        प्रश्न 4. भाव स्पष्ट कीजिए –
        और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है
        या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है उसे विफलता नहीं
        उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

          उत्तर — संगतकार जब गाता है तब उसके आवाज़ एक स्पष्ट रूप से एक घबराहट सुनाई देता है| वो होता है अपनी आवाज़ को मुख्य गायक की आवाज़ से कभी ऊँचा नहीं उठने देने का| कवि के अनुसार इसे संगतकार की असफलता नहीं माननी चाहिए चूँकि संगतकार अगर चाहे तो ऐसा कर सकता है परन्तु मुख्य गायक की आवाज़ का महत्व बरकरार रखने के लिए वो ऐसा करता है| यह संगतकार की महानता का परिचय है|

          प्रश्न 5. किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से अपना योगदान देते हैं। कोई एक उदाहरण देकर इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

            उत्तर — किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से योगदान देते हैं। एक प्रसिद्ध गायक के पीछे उसमें संगीत निर्देशक, गीतकार, संगीत देने वाले, सह-गायक, निर्माता जैसे लोगों की भी भूमिका अहम होती है| उसके प्रसिद्धि में इन सबकी मेहनत भी सम्मिलित होती है|

            प्रश्न 6. कभी-कभी तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचकर मुख्य गायक का स्वर बिखरता नज़र आता है उस समय संगतकार उसे बिखरने से बचा लेता है। इस कथन के आलोक में संगतकार की विशेष भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

              उत्तर — जब मुख्य गायक का गायन तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचता है तब उसके स्वर बिखरने लगते हैं, शक्ति समाप्त होने लगती है| ऐसे समय में संगतकार उसके पीछे मुख्य धुन को दोहरा कर इस बिखराव को संभालता है और उसकी शक्ति और उत्साह को वापस लाने में योगदान देता है|

              प्रश्न 7. सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाते हैं तब उसे सहयोगी किस तरह सँभालते हैं?

                उत्तर — सफलता पर पहुँच कर यदि व्यक्ति लड़खड़ाते हैं तब उसे सहयोगी हौंसला, साहस और उत्साह बढ़ाकर उसे संभालते हैं| उसकी कमियों को बताते हैं और हो सके तो उन्हें ठीक करते हैं| पिछली असफलता को भूलने में मदद करते हैं और आगे बढ़ने को प्रेरित करते हैं|

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                ▪️हिंदी ( कक्षा 9) — क्षितिज भाग 1 और कृतिका भाग 1

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