मुहावरा — मुहावरा एक ऐसा वाक्यांश होता है जिसका अर्थ उसके शब्दों के अर्थ से भिन्न होता है। यह भाषा में विशेष अर्थ या भावना व्यक्त करने के लिए प्रयोग होता है। मुहावरों का उपयोग किसी विशेष स्थिति, भावना या विचार को संक्षेप में और प्रभावशाली तरीके से व्यक्त करने के लिए किया जाता है। मुहावरे में प्राय: भाव-साम्य के दृष्टिकोण से एक स्थिति के अर्थ को दूसरी स्थिति में आरोपित किया जाता है | उदाहरण के लिए, “आसमान से गिरना और खजूर में लटकना” का अर्थ है मुश्किल स्थिति में होना | इस मुहावरे का प्रयोग प्रायः उस स्थिति में किया जाता है जब कोई व्यक्ति किसी एक विकट परिस्थिति से निकलने की कोशिश में किसी दूसरी विकट परिस्थिति में जा फंसता है |
लोकोक्ति — लोकोक्ति एक ऐसी प्रचलित कहावत या मुहावरा होता है, जो आमतौर पर जीवन के अनुभवों और ज्ञान को संक्षिप्त रूप में व्यक्त करता है। यह समाज में सदियों से प्रचलित होती हैं और इनमें कोई विशेष अर्थ या शिक्षा निहित होती है। लोकोक्तियाँ अक्सर किसी विशेष परिस्थिति या व्यवहार के संदर्भ में उपयोग की जाती हैं, जैसे “जैसी करनी, वैसी भरनी” सदियों से बड़े बुजुर्ग इस कहावत या लोकोक्ति के माध्यम से अपने बच्चों को शिक्षा देते आए हैं कि हमें अच्छे कर्म करने चाहिए क्योंकि हम जैसा कर्म करते हैं, वैसा ही फल हमें मिलता है |
प्रमुख मुहावरे / लोकोक्तियाँ व उनके अर्थ
| मुहावरा / लोकोक्ति | अर्थ |
| डंका जमाना | प्रभाव बढ़ाना |
| अंधे की लकड़ी | एकमात्र सहारा |
| आँखों का तारा | बहुत प्यारा |
| टाँग अड़ाना | अड़चन पैदा करना |
| जूते पड़ना | अपमान या निंदा होना |
| बात का बतंगड़ बनाना | छोटी सी बात को बढ़ाना |
| आ बैल मुझे मार | खुद मुसीबत मोल लेना |
| ऊँट के मुँह में जीरा | आवश्यकता से बहुत कम |
| छोटा मुँह बड़ी बात | हैसियत से बड़ी बात कहना |
| डंके की चोट पर कहना | खुल्लम खुल्ला कहना |
| एक और एक ग्यारह होना | मिलकर ताकत बढ़ाना |
| ईद का चाँद होना | बहुत कम नजर आना |
| उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे | दोषी का निर्दोष पर आरोप लगाना |
| ऊँची दुकान फीका पकवान | घटिया वस्तु अधिक दिखावा |
| उंगली पर नचाना | वश में करना |
| ओखली में सिर देना | मुसीबत मोल लेना |
| काला अक्षर भैंस बराबर | निरक्षर होना |
| नाम डुबोना | प्रतिष्ठा कम करना |
| चहल पहल होना | रौनक होना |
| घोड़े बेचकर सोना | बेफ़िक्र होकर सोना |
| कुएँ में भांग पड़ना | सभी का एक जैसा व्यवहार होना |
| गागर में सागर | संक्षेप में बहुत कुछ कहना |
| गले का हार होना | अत्यंत प्रिय होना |
| घर का भेदी लंका ढाए | अपने ही अपनों को नुकसान पहुँचाते हैं |
| घाव पर नमक छिड़कना | चोट पर और चोट देना |
| आँखें सेकना | दर्शन का सुख लेना |
| खून के आँसू रुलाना | बहुत परेशान करना |
| चादर देखकर पैर पसारना | सामर्थ्यानुसार काम करना |
| चार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रात | थोड़े समय की खुशी |
| चिराग तले अंधेरा | निकट की वस्तु का ज्ञान न होना |
| छोटा मुँह बड़ी बात | सामर्थ्य से अधिक कहना |
| छाती पर मूँग दलना | जानबूझकर कष्ट देना |
| जान में जान आना | कठिनाई दूर होने पर राहत मिलना |
| घाट घाट का पानी पीना | बहुत अनुभवी होना |
| एड़ी चोटी का जोर लगाना | बहुत प्रयास करना |
| जली कटी सुनना | बुरा भला कहना |
| जितने मुँह उतनी बातें | प्रत्येक की अलग राय होना |
| जी का जंजाल | मुसीबत |
| जो गरजते हैं वो बरसते नहीं | जो बड़ी बातें करते हैं या धमकी देते हैं , वे अक्सर प्रभावी नहीं होते |
| टेढ़ी खीर होना | कठिन काम |
| ठगा सा रह जाना | आश्चर्यचकित रह जाना |
| ढाक के तीन पात | स्थिति का यथावत रहना |
| टुकुर टुकुर देखना | एकटक देखना |
| डूब मरना | लज्जित होना |
| दोनों हाथों में लड्डू | दोहरे लाभ की स्थिति |
| नाच न जाने आँगन टेढ़ा | अपनी कमी का दोष दूसरों पर मढ़ना |
| नाम बड़े दर्शन छोटे | नाम के अनुरूप कार्य न होना |
| नौ दो ग्यारह होना | भाग जाना |
| दाल में काला होना | संदेह होना |
| तौबा करना | भविष्य में किसी काम को न करने का निर्णय लेना |
| गड़े मुर्दे उखड़ना | पुरानी बातों को छेड़ना |
| पंचों की राय सर माथे | राय स्वीकार करना |
| पलकों पर बिठाना | अत्यधिक स्नेह देना |
| प्यार अंधा होता है | प्रेम में सही-गलत का ज्ञान न होना |
| फिरकी लेना | चकमा देना |
| ईद का चाँद होना | बहुत कम दिखाई देना |
| गूलर का फूल होना | बहुत कम दिखाई देना |
| गुड़ गोबर करना | बना बनाया काम बिगड़ना |
| फूटी आँख न सुहाना | बिलकुल पसंद न होना |
| बड़ा बोल बड़ाई नहीं | आत्मप्रशंसा से बड़ाई नहीं होती |
| बड़ों के मुँह लगना | बड़ों से झगड़ा करना |
| बगुला भगत | कपटी |
| गुरु घंटाल | दुष्टों का सरदार |
| गंगा नहाना | कोई बड़ा कर्तव्य पूरा करके निश्चिन्त होना |
| मनचला | उन्मुक्त या स्वच्छंद |
| मुँह मीठा करना | खुशी मनाना |
| यथा राजा तथा प्रजा | जैसा नेता वैसी जनता |
| रंग में भंग पड़ना | आनंद में बाधा |
| राम राम जपना पराया माल अपना | दिखावे की भक्ति करना और दूसरों का माल हड़पना |
| लंगूर के हाथ में अंगूर | अयोग्य के पास मूल्यवान वस्तु होना |
| लंबी-चौड़ी छोड़ना/ हाँकना | डींगें हाँकना |
| लोहा मानना / मनवाना | श्रेष्ठता स्वीकार करना/ करवाना |
| संसार चक्र | दुनिया का चलन |
| खून ठंडा होना | उत्साह कम होना |
| गज भर की छाती होना | बहुत साहसी होना |
| गाँठ का पूरा, आँख का अंधा | धनी किन्तु मूर्ख व्यक्ति |
| गधे को बाप बनाना | अपना काम निकलने के लिये मूर्ख की खुशामद करना |
| पासा पलटना | स्थिति बदल जाना |
| दीवारों के कान होना | किसी गोपनीय बात को अकेले में भी स्पष्ट न कहना |
| गाढ़ी कमाई | मेहनत की कमाई |
| तिनके का सहारा | छोटी सी मदद |
| गुल खिलाना | कोई समस्या पैदा करना |
| गूँगे का गुड़ | अवर्णनीय वस्तु या घटना |
| गोबर गणेश | मूर्ख व्यक्ति |
| चिराग तले अंधेरा | प्रभावी व्यक्ति के पास रहकर ही उलटा व्यवहार होना |
| छाती पर साँप लोटना | ईर्ष्या करना |
| अपनी खिचड़ी अलग पकाना | अपने ढंग से चलना |
| अपना सा मुँह लेकर रह जाना | लज्जित होना |
| अपने पैरों पर खड़ा होना | आत्मनिर्भर बनना |
| आँखों में सरसों फूलना | प्रसन्न होना |
| ऊँट के मुँह में जीरा | बहुत कम |
| एक अनार सौ बीमार | एक वस्तु, अनेक चाहने वाले |
| टस से मस न होना | कुछ असर न पड़ना |
| कच्चा चिट्ठा खोलना | गुप्त भेद खोलना |
| कलम तोडना | बहुत अच्छा लिखना |
| कागज़ काले करना | बेकार में लिखना या बेहूदा लिखना |
| कान पर जूँ न रेंगना | कोई प्रभाव न पड़ना |
| कोल्हू का बैल | बहुत मेहनती |
| छीँका टूटना | अचानक लाभ होना |
| जूती चाटना | खुशामद करना |
| जड़ से उखाड़ना | पूरा विनाश करना |
| जहर उगालना | कड़वी बात कहना |
| जले पर नमक छिड़कना | दुःखी व्यक्ति को और दुःखी करना |
| ठीकरा फोड़ना | दोष लगाना |
| हाथ में दही जमाना | बहुत उतावला होना |
| कच्ची गोलियां खेलना | अनुभव की कमी होना |
| मखमली जूते मारना | मीठी बातों से लज्जित करना |
| चाँदी का जूता मारना | रिश्वत देना |
1 thought on “मुहावरे व लोकोक्तियाँ”